आज यानी 6 जुलाई से सावन का पवित्र महीना आरंभ हो चुका है। मान्यता है कि सावन का महीना भगवान शिव को बहुत ही प्रिय होता है। इस महीने में शिव भक्त भगवान भोले नाथ की विशेष आराधना करते हैं। सावन सोमवार के दिन सुबह से लोग शिवालयों में एकत्रित होकर शिवलिंग पर जलाभिषेक और अन्य तरह की पूजा सामग्रियों को अर्पित करते हैं। सावन के महीने में महादेव को प्रसन्न करने के लिए कई तरह की साधनाएं की जाती है। ऐसा माना जाता है कि सावन के महीने में शिवजी की पूजा करने से सभी तरह की मनोकामना पूरी होती है। भगवान शिव की कुछ ऐसी भी साधना होती है जिसको सावन के महीने में करने से बड़े से बड़े शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। शिव पुराण के अनुसार इस ब्रह्राांड में तीन बड़े अस्त्र माने गए हैं- पशुपतास्त्र, नारायणास्त्र और ब्रह्मास्त्र। भगवान शिव के पास त्रिशूल के अलावा चार शूलों वाला परम शक्तिशाली दिव्य अस्त्र है, जिसे पशुपतास्त्र कहते हैं।
Sawan 2020: सावन के महीने में भगवान शिव की इस साधना से हर क्षेत्र में प्राप्त होती है विजय
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महाभारत के युद्ध में अर्जुन एक महान योद्धा थे। उन्होंने युद्ध पर विजय प्राप्त करने और शत्रुओं पर जीत के लिए भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। तब भगवान शिव ने उन्हें पाशुपतास्त्र देते हुए कहा था कि इसे तुम्हें चलाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इसे पास रखने मात्र से ही तुम्हारी विजय हो जाएगी।
ये है विजय दिलाने वाली शिव साधना
पुराणों में कहा गया है कि जो भी शिव भक्त सावन के सोमवार या शिवरात्रि के अवसर पर शिव की साधना करता है भगवान शिव उससे प्रसन्न होकर उसे शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने का आशीर्वाद देते हैं। शिव जी की पाशुपतास्त्र की साधना सभी कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। सावन और शिवरात्रि पर पाशुपतास्त्र स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। इस शिव साधना से हर कार्य में विजय अवश्य होती है।
शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान शिव की साधना करने से सभी प्राणी जगत के लिए कल्याणकारी सिद्ध होता है। शिव जी के महाकाल स्वरूप की साधना करने से सभी प्रकार से सिद्धियों पर विजय प्राप्त होती है और मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है। माना जाता है महाकाल की पूजा करने से बड़े से बड़ा संकट बहुत ही जल्द टल जाता है। सावन के महीने में महाकाल की साधना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। सावन माह में सभी 12 ज्योतिर्लिंग में से एक मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर शिवलिंग का दर्शन एवं पूजन शिव की विशेष कृपा दिलाने वाला है।
लंका विजय के लिए प्रभु राम ने भी युद्ध में जाने से पहले भगवान शिव की इस दिव्य साधना को किया था। इसी के बाद भगवान राम ने रावण का अंत किया था। यह साधना प्रदोष काल में विशेष रूप से फलित होती है। सावन और शिवरात्रि पर अगर इस साधना को किया जाय तो शत्रु पर अवश्य विजय प्राप्त होती है।