पूजा-पाठ में ताजी चीजों का ही उपयोग किया जाता है। बासी जल, पत्ते, फूल और बासी फलों का प्रयोग पूजा में नहीं करना चाहिए। बासी चीजों का प्रयोग पूजा में पूर्णतया वर्जित माना गया है। लेकिन क्या आपको पता है कि कुछ चीजेें ऐसी भी है जिनके बासी नहीं माना जाता है और एक बार चढ़ाने के बाद इनका उपयोग दोबारा किया जा सकता है। आइए जानते हैं वे कौन सी चीजे हैं जिनको एक बार अर्पित करने के बाद दोबारा पूजा में प्रयोग किया जा सकता है..
Sawan 2020: पूजा की ये चार सामग्री कभी नहीं होती बासी, देवी-देवताओं को होती है बहुत प्रिय
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शास्त्रों में कहा गया है कि बासी जल को पूजा में प्रयोग नहीं करना चाहिए। लेकिन गंगाजल को सबसे पवित्र माना गया है यह कभी भी बासी नहीं होता है। स्कंद पुराण में इस बात का उल्लेख किया गया है। वायुपुराण में भी कहा गया है कि वर्षों पुराना गंगाजल भी खराब नहीं होता है।
बिल्वपत्र को भी कई माह तक बासी नहीं माना जाता है। इसे भी दोबारा पूजा में प्रयोग किया जा सकता है। बेलपत्र को एक बार अर्पित करन के बाद दोबारा धोकर उसे फिर से चढ़ाया जा सकता है। लेकिन ध्यान रहें को जो बेलपत्र आप अर्पित कर रहें हैं वह कट-फटा नहीं होना चाहिए।
पूजा-पाठ में फूल अवश्य चढ़ाए जाते हैं लेकिन बासी फूलों का प्रयोग पूजा में वर्जित होता है। साथ ही सूखे और बासी फूल मंदिर में से हटा देने चाहिए। लेकिन कमल के फूल को भी बासी नहीं मानते हैं इसकी बासी होने की अवधि पांच दिनों की मानी गई है। पांच दिनों तक कमल के फूल तो ताजा ही माना जाता है। पांच दिन तक इसे दोबारा से पूजा के प्रयोग में लाया जा सकता है।
तुलसी के पत्तो का भी कभी बासी नहीं माना जाता है अगर किसी कारणवश तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ सकते हैं या तुलसी के पत्ते नहीं मिल रहे हैं तो अर्पित किए गए तुलसी के पत्तों को दोबारा से पूजा में प्रयोग कर सकते हैं। और भगवान को अर्पित कर सकते हैं। पूजा के बाद मंदिर से तुलसी निकाल कर बहते जल में प्रवाहित कर देना चाहिए। किसी गमले या क्यारी में डाल देनी चाहिए लेकिन जहां पर भी तुलसी की पत्तियां डाले वह जगह एक दम स्वच्छ हो।