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Sankashti Chaturthi 2023: द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और चंद्रोदय समय

Thu, 09 Feb 2023 09:18 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Thu, 09 Feb 2023 09:18 AM IST
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Sankashti Chaturthi 2023 Kab Hai Date Know Puja Vidhi and Shubh Yog in Hindi
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2023 - फोटो : iStock

Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2023: फाल्गुन माह में कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस बार फाल्गुन मास की द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत 9 फरवरी दिन गुरुवार को रखा जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन विधि-विधान से गौरी पुत्र श्री गणेश की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। ऐसा कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से गणपति बप्पा की पूजा अर्चना करता है, उसके जीवन से सभी दुख और संकट दूर हो जाते हैं। साथ ही जीवन में मंगल का आगमन होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी का आशय संकट को रहने वाली चतुर्थी तिथि से है। ऐसे में आइए जानते हैं संकष्टी चतुर्थी का मुहूर्त, व्रत विधि और इसका महत्व क्या है...



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Sankashti Chaturthi 2023 Kab Hai Date Know Puja Vidhi and Shubh Yog in Hindi
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2023 - फोटो : iStock

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2023 तिथि

  • फाल्गुन कृष्ण संकष्टी चतुर्थी तिथि की शुरुआत- 09 फरवरी 2023, सुबह 06 बजकर 23 मिनट से
  • फाल्गुन कृष्ण संकष्टी चतुर्थी तिथि का समापन - 10 फरवरी 2023, सुबह 07 बजकर 58 मिनट पर
  • चंद्रोदय समय - 9 फरवरी 2023 रात 09 बजकर 25 मिनट पर
Sankashti Chaturthi 2023 Kab Hai Date Know Puja Vidhi and Shubh Yog in Hindi
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2023 - फोटो : iStock

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पूजा-विधि

  • सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा के लिए ईशान कोण में चौकी पर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें।
  • सबसे पहले चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं।
  • भगवान के सामने हाथ जोड़कर पूजा और व्रत का संकल्प लें।
  • गणेश जी को जल, अक्षत, दूर्वा घास, लड्डू, पान, धूप आदि अर्पित करें।
  • 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करते हुए भगवान गणेश से प्रार्थना करें।
  • इसके उपरांत एक केले का पत्ता लें, इस पर आपको रोली से चौक बनाएं।
  • चौक  के अग्र भाग पर घी का दीपक रखें।  
  • संकष्टी चतुर्थी का व्रत शाम के समय चंद्र दर्शन के बाद ही खोला जाता है। चांद निकलने से पहले गणपति की पूजा करें।
  • पूजा के बाद चंद्रमा को शहद, चंदन, रोली मिश्रित दूध से अर्घ्य दें और व्रत का पारण करें।
  • पूजन समाप्ति और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही अन्न का दान करें और भगवान से प्रार्थना भी करें।

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Sankashti Chaturthi 2023 Kab Hai Date Know Puja Vidhi and Shubh Yog in Hindi
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2023 - फोटो : istock

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का महत्व
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का शास्त्रों में विशेष महत्व है। इस दिन पूरे विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा और व्रत किया जाता है। भगवान गणेश देवताओं में सर्वश्रेष्ठ हैं और सर्वप्रथम पूजनीय हैं। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से जातक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं और सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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