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Ram Navami 2021: अयोध्या से ही नहीं, ओरछा से भी है प्रभु श्रीराम का गहरा नाता

Sun, 18 Apr 2021 08:19 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Sun, 18 Apr 2021 08:19 PM IST
सार

ओरछा में भगवान श्रीराम का मंदिर देश-दुनिया में विशेष मान्यता रखता है। यहां राम, भगवान के रूप में ही नहीं वरन् ओरछा राज्य के राजा के रूप में पूजे जाते हैं और आज भी उन्हीं का शासन ओरछा में चलता है।

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Ram Navami 2021 history of orchha temple relates to Lord Rama
राम नवमी 2021 - फोटो : Social media

मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड संभाग में बेतवा नदी के किनारे स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल ओरछा में भगवान श्रीराम का मंदिर देश-दुनिया में विशेष मान्यता रखता है। यहां राम, भगवान के रूप में ही नहीं वरन् ओरछा राज्य के राजा के रूप में पूजे जाते हैं और आज भी उन्हीं का शासन ओरछा में चलता है।

Ram Navami 2021 history of orchha temple relates to Lord Rama
राम राजा मंदिर, ओरछा - फोटो : Facebook/Harsh Wardhan Jog
प्राचीन कथा

कहा जाता है कि 16वीं शताब्दी में ओरछा के बुंदेल शासक मधुकर शाह की महारानी कुंवरि गणेश अयोध्या से रामलला को ओरछा ले आई थीं। कथा है कि महाराजा मधुकर शाह ने अपनी पत्नी गणेश कुंवरि से वृंदावन साथ चलने के लिए कहा। पौराणिक कथाओं के अनुसार मधुकर शाह कृष्ण भक्त थे। मगर महारानी तो भगवान राम की भक्ति में लीन रहतीं थी, इसलिए उन्होंने जाने से मना कर दिया। महाराजा ने महारानी से क्रोध में आकर कहा, इतनी रामभक्त हो तो अपने राम को ओरछा ले आओ। इसके बाद रानी अयोध्या गईं और वहां सरयू तट पर साधना शुरू कर दी। वहां संत तुलसीदास से आशीर्वाद पाकर उनकी तपस्या और कठोर हो गई। कई महीनों बाद भी राम जी के दर्शन नहीं हुए तो रानी नदी में कूद गईं। नदी में उन्हें राम जी के दर्शन हुए, तब रानी ने राम जी को ओरछा चलने के लिए निवेदन किया। राम जी से रानी ने ओरछा में उनकी सत्ता और राजशाही का वादा किया। इसके बाद ओरछा के महाराजा मधुकर शाह ने ओरछा में भगवान राम के मंदिर की स्थापना की। इसी कारण यहां राम जी की पूजा, राजा के रूप में होती है।

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ओरछा - फोटो : File Photo
होती है सलामी

यह एकमात्र मंदिर है, जहां पुलिस सुबह और शाम सलामी देती है। यहां मध्य प्रदेश पुलिस के जवान सूर्योदय और सूर्यास्त पर बंदूकों से सलामी देते हैं। सलामी देने का सिलसिला सालों से चला आ रहा है, जो आज भी जारी है। यहां भक्तों को पान का बना हुआ प्रसाद भी खिलाया जाता है।

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जहांगीर महल, ओरछा - फोटो : Facebook/Incredible India
विदेशी पर्यटक भी आते हैं

ओरछा में प्रतिवर्ष करीब 5 लाख से ज्यादा स्वदेशी पर्यटक पर्यटन के साथ धर्मलाभ लेने के लिए आते हैं। इनके अलावा लगभग बीस हजार से ज्यादा विदेशी पर्यटक ओरछा के पुरातात्विक महत्व के खूबसूरत महलों, विशाल किले, शीश महल, जहांगीर महल, राय प्रवीण महल, लक्ष्मी मंदिर, चतुर्भुज मंदिर, बेतवा नदी के तट पर छतरियां और कई प्राचीन काल की भव्य इमारतों की कारीगरी, उनका वैभव देखने आते हैं।

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ओरछा के खूबसूरत मंदिर - फोटो : Facebook/Manoj Rai

राम राजा मंदिर में दोहा लिखा है : दिवस ओरछा रहत हैं, रैन अयोध्या वास।
अयोध्या उत्तर प्रदेश से मध्य प्रदेश के ओरछा की दूरी तकरीबन साढ़े चार सौ किलोमीटर है, लेकिन इन दोनों ही जगहों के बीच गहरा नाता है। जिस तरह अयोध्या के कण-कण में राम हैं, उसी तरह ओरछा से भी भगवान राम का गहरा लगाव है। राम के अयोध्या और ओरछा, दोनों जगहों पर रहने की बात कहता एक दोहा आज भी राम राजा मंदिर में लिखा है : दिवस ओरछा रहत हैं रैन अयोध्या वास। अर्थात भगवान राम दिन में ओरछा में तो रात को अयोध्या में वास करते हैं।

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