Ram Navami 2020: भगवान राम के बारे में सुनी-अनसुनी 10 कथाएं
त्रेतायुग में जन्में भगवान श्री राम अयोध्या के महाराज दशरथ के सबसे बड़े पुत्र थे। लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न राम के भाई थे। भगवान राम की मां कौशल्या थी और शेष सुमित्रा और कैकयी के पुत्र थे। भगवान राम का विवाह मिथिला नरेश राजा जनक की पुत्री सीता के साथ हुआ था।
लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला, शत्रुध्न की पत्नी श्रुतकीर्ति और भरत की पत्नी मांडवी थी। विवाह के पश्चात् भगवान राम को राजा दशरथ ने रानी कैकयी के कहने पर 14 वर्ष के लिए वनवास पर भेज दिया था क्योंकि एक वचन के अनुसार कैकेयी राजा दशरथ से कुछ भी मांग सकती थी तो रानी कैकेयी ने दासी मंदोदरी के उकसाने पर भरत को अयोध्या का राजा बनाने और राम को वनवास देने की इच्छा जताई और पिता की आज्ञा का पालन करके भगवान राम सीता और लक्ष्मण के साथ वन की ओर चले गए।
ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश में से भगवान विष्णु ने संसार की भलाई के लिए कई अवतार लिए हैं। भगवान विष्णु द्वारा कुल 10 अवतार लिए गए जिसमें से भगवान राम सातवें अवतार माने जाते हैं और यह अवतार भगवान विष्णु के सभी अवतारों में से सबसे ज्यादा पूज्यनीय माना जाता है।
भगवान श्री राम के बारे में महर्षि वाल्मीकि द्वारा अनेक कथाएं लिखी गई हैं। वाल्मीकि के अलावा प्रसिद्ध महाकवि तुलसीदास ने भी श्री राम के महत्व को लोगों को समझाया है। भगवान राम ने कई ऐसे महान कार्य किए हैं जिसने हिन्दू धर्म को एक गौरवमयी इतिहास प्रदान किया है।
भगवान विष्णु ने राम बनकर असुरों का संहार करने के लिए पृथ्वी पर जन्म लिया। भगवान श्री राम ने मातृ−पितृ भक्ति के चलते अपने पिता राजा दशरथ के एक आदेश पर 14 वर्ष तक वनवास काटा। नैतिकता, वीरता, कर्तव्यपरायणता के जो उदाहरण भगवान राम ने प्रस्तुत किए वह बाद में मानव जीवन के लिए मार्गदर्शक बन गए।
भगवान राम अपनी प्रजा को हर तरह से सुखी रखना चाहते थे। उनकी धारणा थी कि जिस राजा के शासन में प्रजा दुखी रहती है, वह राजा नरक भोगी होता है। महाकवि तुलसीदास जी ने रामचरितमानस् में रामराज्य की विशद चर्चा की है। माना जाता है कि अयोध्या में ग्यारह हजार वर्षों तक भगवान राम का दिव्य शासन रहा।
वनवास के दौरान भगवान श्री राम ने देश के सभी आदिवासियों और दलितों को संगठित करने का कार्य किया और उनको जीवन जीने की शिक्षा दी। उन्होंने देश के सभी संतों और उनके आश्रमों को राक्षसों, दैत्यों के आतंक से बचाया था। अपने 14 वर्ष के वनवास के दौरान भगवान राम ने भारत की सभी जातियों और संप्रदायों को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया।
चित्रकूट में रहकर भी उन्होंने धर्म और कर्म की शिक्षा दीक्षा ली। भगवान राम ने भारत भर में भ्रमण कर भारतीय आदिवासी, जनजाति, पहाड़ी और समुद्री लोगों के बीच सत्य, प्रेम, मर्यादा और सेवा का संदेश फैलाया और यही कारण था कि राम का जब रावण से युद्ध हुआ तो सभी तरह की अनार्य जातियों ने राम का साथ दिया।