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Pitru Paksha 2023: पाना चाहते हैं पूर्वजों की कृपा, तो पितृपक्ष में करें इन नियमों का पालन

Mon, 02 Oct 2023 01:45 PM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Mon, 02 Oct 2023 01:45 PM IST
सार

Pitru Paksha 2023: शास्त्रों में गाय, कौवा, बिल्ली, कुत्ता और ब्राह्मण को भोजन कराकर पितरों को खुश करने की बात लिखी गई है। पितरों के हिस्से के भोजन को इन्हीं भागों से उन तक पहुंचाया जाता है।
 

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Pitru Paksha 2023 shradh bhoj niyam follow these rules during shradh and pind daan
पितृपक्ष में करें इन नियमों का पालन - फोटो : अमर उजाला

Pitru Paksha 2023: श्राद्ध-कर्म में तर्पण को सबसे महत्वपूर्ण अंग माना गया है। इसके बाद श्रद्धानुसार भोजन बनाकर कराना दूसरा महत्वपूर्ण अंग है। तीसरा अंग है त्याग। इसके तहत श्राद्ध पक्ष में बनने वाले भोजन को छह भागों में विभाजित किया गया है। शास्त्रों में गाय, कौवा, बिल्ली, कुत्ता और ब्राह्मण को भोजन कराकर पितरों को सुखी और प्रसन्न करने की बात कही गई है। माना जाता है कि पितरों के हिस्से के भोजन को इन्हीं भागों से उन तक पहुंचाया जाता है। ऐसे में जरूरी है कि श्राद्ध संपन्न करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखा जाए।



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Pitru Paksha 2023 shradh bhoj niyam follow these rules during shradh and pind daan
पितृपक्ष में करें इन नियमों का पालन - फोटो : istock
पहला भाग गाय को

ग्रंथों में गाय को परम पवित्र और पातालवासिनी माना गया है। गाय के संपूर्ण अंगों में परमात्मा निवास करते हैं। शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि गाय के जरिये बैकुंठ के दर्शन होते हैं। यही वैतरणी पार लगाती है। इसलिए श्राद्ध के दौरान गाय को भोजन कराने से पितृ प्रसन्न होते हैं और उनकी मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

Pitru Paksha 2023 shradh bhoj niyam follow these rules during shradh and pind daan
पितृपक्ष में करें इन नियमों का पालन - फोटो : iStock
कौवे को दूसरा हिस्सा

श्राद्वान्न में दूसरा हिस्सा कौवे को समर्पित है। श्राद्ध पक्ष में कौवे को महत्व देने के पीछे कारण यह है कि जब समुद्र मंथन हुआ था तो कौवे ने अमृत पीकर अमरता प्राप्त कर ली थी। माना जाता है कि कौवे अच्छे-बुरे कर्मों के साक्षी होते हैं। ये परमात्मा तक हमारे कर्मों का लेखा-जोखा पहुंचाते हैं। इन्हें पितरों का संदेशवाहक माना जाता है। इसलिए इन्हें कराया गया भोजन पितरों तक पहुंचता है और उन्हें संतुष्टि मिलती है।

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पितृपक्ष में करें इन नियमों का पालन - फोटो : अमर उजाला
भोजन का तीसरा भाग

बिल्ली को लक्ष्मी का रूप माना जाता है। माना जाता है कि बिल्ली पितरों की फरियाद लेकर माता लक्ष्मी के पास जाती है। इससे भी पितरों की मुक्ति की राह आसान होती है। इसलिए भोजन का तीसरा हिस्सा बिल्ली को देने का विधान है।

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पितृपक्ष में करें इन नियमों का पालन - फोटो : अमर उजाला
ब्राह्मण भोज जरूरी

शास्त्रों में ब्राह्मण को गुरु के बराबर की पदवी दी गई है। इसलिए पितरों के मोक्ष के लिए ब्राह्मणों को भोजन कराने का महत्व सबसे अधिक बताया गया है। इसमें यह बात ध्यान रखी जानी चाहिए कि ब्राह्मण अच्छे कर्म-कांड करने वाला होना चाहिए। श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मण को हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुख करके ही भोजन कराना चाहिए और भोज के बाद यथाशक्ति दान करना चाहिए।

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