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Pitru Paksha 2022: कब है मातृ नवमी? जानें पितृपक्ष में मातृ नवमी का क्या है महत्व

Mon, 02 Oct 2023 12:46 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Mon, 02 Oct 2023 12:46 AM IST
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Pitru Paksha 2022 Importance of Matra Navami and Shraddh Vidhi in Hindi
पितृपक्ष में मातृ नवमी का महत्व - फोटो : अमर उजाला

Pitru Paksha 2022 Matra Navami Importance: पितृ पक्ष 10 सितंबर 2022 से आरंभ हो रहे हैं। भाद्रपद की पूर्णिमा और अश्विन मास की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को पितृ पक्ष कहते हैं। ब्रह्मपुराण के अनुसार सर्वप्रथम अपने पूर्वजों की पूजा करनी चाहिए। इससे देवता प्रसन्न होते हैं। वैसे तो श्राद्ध मृत्यु तिथि पर किया जाता है लेकिन यदि तिथि याद नहीं तो आश्विन की अमावस्या तिथि पर पूजा की जा सकती है जिसे सर्व प्रभु अमावस्या भी कहा जाता है। वैसे तो पितृपक्ष में पूरे 15 दिनों तक तिथि के अनुसार पिंडदान किया जाता है। लेकिन नवमी तिथि के दिन दिवंगत माताओं का श्राद्ध कर्म किया जाता है। इसलिए इस तिथि को  मातृ नवमी श्राद्ध के नाम से जानते हैं। मातृ नवमी के दिन उन दिवंगत माताओं, बहुओं व बेटियों का पिंडदान किया जाता है जिनकी मृत्यु सुहागिन स्त्री के रूप में हुई। मान्यता है कि इस दिन दिवंगत महिलाओं का श्राद्ध करने से इनकी आत्मा को शांति मिलती है।

Pitru Paksha 2022 Importance of Matra Navami and Shraddh Vidhi in Hindi
पितृपक्ष में मातृ नवमी का महत्व - फोटो : amar ujala

कब है मातृ नवमी
नवमी तिथि प्रारंभ:  18 सितंबर, रविवार, सायं 4:30 बजे 
नवमी तिथि समाप्त: 19 सितंबर, सोमवार, सायं 6:30 बजे तक 
उदयातिथि के अनुसार 19 सितंबर को दिवंगत माताओं का श्राद्ध किया जाएगा, जिसे मातृ नवमी कहते हैं।

Pitru Paksha 2022 Importance of Matra Navami and Shraddh Vidhi in Hindi
पितृपक्ष में मातृ नवमी का महत्व - फोटो : गूगल

मातृ नवमी का महत्व
पितृपक्ष में पितरों का श्राद्ध कर उनकी आत्मा को शांति दी जाती है। पितृपक्ष की नवमी तिथि के दिन दिवंगत माताओं की पूजा की जाती है, इस दिन को मातृ नवमी के नाम से जानते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन दिवंगत माताओं, बहनों, या बेटियों का श्राद्ध करने से परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ती है। इसके साथ ही यदि घर की महिला इस दिन पूजा पाठ या व्रत करती है तो उसे सौभाग्य की प्राप्ति होती है। 
 

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Pitru Paksha 2022 Importance of Matra Navami and Shraddh Vidhi in Hindi
पितृपक्ष में मातृ नवमी का महत्व - फोटो : prayagraj

मातृ नवमी श्राद्ध  विधि

  • श्राद्ध पक्ष की नवमी तिथि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। 
  • यदि आप यह विधि घर पर कर रहे हैं तो घर के दक्षिण दिशा में एक चौकी रखकर उस पर सफेद रंग का वस्त्र या आसन बिछाएं। 
  • इसके बाद चौकी पर अपने परिवार के मृत परिजन(माता, दादी, बहन) की फोटो रखकर इस पर फूल माला चढ़ाएं। 
  • इसके उपरांत उनके समक्ष काले तिल का दीपक जलाएं। 
  • दीपक जलाने के बाद अपने पितृ की तस्वीर पर गंगाजल और तुलसी दल अर्पित करें। 
  • फिर गरुड़ पुराण या श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करें। 
  • पूजा के बाद अपने पितरों के लिए भोजन निकालें। 
  • पंचबलि यानी गाय, कौआ, चींटी, चिड़िया और ब्राह्मण को भी के लिए भी भोजन निकालें।
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