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परिवर्तिनी एकादशी 2020: जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Fri, 21 Aug 2020 07:50 PM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Fri, 21 Aug 2020 07:50 PM IST
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parivartini parsva ekadashi 2020 date shubh muhurat puja vidhi and importance
परिवर्तिनी एकादशी 2020 - फोटो : अमर उजाला।

परिवर्तिनी एकादशी के दिन श्री हरि भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा की जाती है। वामन अवतार में ही तीन पग में विष्णु जी ने राजा बलि की सारा राजपाठ नाप लिया था। परिवर्तिनी एकादशी को पद्मा एकादशी भी कहते हैं। इस बार यह एकादशी 29 अगस्त शनिवार के दिन पड़ रही है। इस दिन विष्णु जी शयन करते हुए स्थान परिवर्तन करते हैं इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। तो आइए जानते हैं इसका महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि...

parivartini parsva ekadashi 2020 date shubh muhurat puja vidhi and importance
परिवर्तिनी एकादशी 2020 महत्व (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : lord vishnu

परिवर्तिनी एकादशी का महत्व
इस दिन श्रद्धा और नियम पूर्वक व्रत करने से मनुष्य के सारे पापकर्म नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। अज्ञानता का नाश होता है। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से उनकी कृपा भी प्राप्त होती है। इस व्रत को करने से वाजपेय यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है। 

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परिवर्तिनी एकादशी 2020 प्रतीकात्मक तस्वीर

परिवर्तिनी एकादशी 2020 तिथि और शुभ मुहूर्त
28 अगस्त को सुबह 08:38 से एकदशी तिथि आरंभ होगी। 
29 अगस्त सुबह 08:17 मिनट पर एकादशी तिथि का समापन होगा।  
30 अगस्त को सुबह 05:58 मिनट से लेकर सुबह 08:21 मिनट तक व्रत के पारण का समय रहेगा।

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भगवान विष्णु - फोटो : ANI

परिवर्तिनी एकादशी व्रत और पूजा विधि 
एकादशी का व्रत करने वालों को एकादशी से एक दिन पहले सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करना चाहिए। जिससे पेट में अन्न का अंश न रहे। एकादशी के व्रत का पारण दूसरे दिन द्वादशी तिथि में पूजा करके किसी ब्राह्मण को भोजन करवाने के बाद किया जाता है। एकादशी के दिन किसी भी तरह के अन्न का प्रयोग वर्जित माना गया है, लेकिन अगर आपकी क्षमता नहीं है तो संध्या काल में पूजन के बाद फल ले सकते हैं। व्रत न रखने वालों को भी इस दिन चावल नहीं खाना चाहिए। आगे जानिए पूजा विधि..
 

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परिवर्तिनी एकादशी 2020 (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पूजा विधि
एकादशी के दिन सुबह उठकर सर्वप्रथम स्नानादि करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु का स्मरण करें, और व्रत का संकल्प करें। भगवान के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें। धूप जलाएं। भगवान विष्णु की पूजा के लिए तिल का उपयोग किया जाता है। विष्णु जी को तुलसी प्रिय है इसलिए तुलसी अवश्य अर्पित करें। इस दिन किसी को अपशब्द न कहें न ही किसी की निंदा करें। पूरा समय भगवान विष्णु का स्मरण करें। दूसरे दिन सूर्योदय के समय उठकर पूजा करें। किसी ब्राह्मण को भोजन करवाकर दान दक्षिणा देकर विदा करें। उसके बाद व्रत का पारण करें।

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