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गणेश चतुर्थी 2020: महाराष्ट्र के इन अष्टविनायक मंदिरों की महिमा है निराली, यहां दर्शन करने से पूरी होती है हर मनोकामना

Fri, 21 Aug 2020 06:02 PM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Fri, 21 Aug 2020 06:02 PM IST
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ganesh chaturthi 2020 ganesh temple Visiting the Ashtavinayak temple of Maharashtra fulfills all the wishes
गणेश चतुर्थी 2020 - फोटो : Pixabay

महाराष्ट्र के पूणे में बप्पा के आठ अष्टविनायक मंदिर हैं, इन मंदिरों के दर्शन करने को अष्टविनायक यात्रा कहते हैं। यहां पर बप्पा अलग-अलग रुपों में विराजते हैं। इन मंदिरों की महिमा बहुत निराली है। इन मंदिरों को स्वयंभू मंदिर कहा जाता है। यानि कि यहां पर गणपति बप्पा की सारी प्रतिमाएं स्वयं प्रकट हुई हैं। ये बहुत ही प्राचीन मंदिर हैं, पुराणों में भी इन मंदिरों का उल्लेख मिलता है। यहां पर दर्शन करने से बप्पा सारे विघ्न दूर करते हैं, और अपने भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। आप भी इन मंदिरों में दर्शन करके प्राप्त कर सकते हैं, बप्पा का आशीर्वाद..

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मयूरेश्वर मंदिर  - फोटो : ashtavinayaktemples

मयूरेश्वर मंदिर 

मयूरेश्वर विनायक मंदिर पुणे के मोरगांव में स्थित है। इस मंदिर के चार द्वार बने हुए है, जिन्हें चारों युगों सतयुग, द्वापर युग, त्रेतायुग और कलियुग के प्रतीक माना गया है। यहां पर गणपति बप्पा बैठी हुई मुद्रा में विराजते हैं। उनकी चार भुजाएं और तीन नेत्र हैं। गणपति बप्पा के साथ यहां पर नंदी जी भी विराजते हैं। इस स्थान का पौराणिक महत्व भी है कथा के अनुसार गणेश जी ने यहां पर सिंधुरासुर नामक राक्षस का अंत मोर पर बैठ कर किया था। इसलिए इस मंदर का नाम मयूरेश्वर पड़ा। यह मंदिर पुणे से लगभग 80 किलोमीटर दूरी पर स्थित है।   

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सिद्धिविनायक मंदिर - फोटो : ashtavinayaktemples

सिद्धिविनायक मंदिर 

सिद्धिविनायक मंदिर अहमदनगर में स्थित है। यह स्थान पुणे से 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर भी अति प्राचीन है। कहा जाता है कि यहीं पर सिद्धटेक स्थान पर विष्णु जी ने अष्टसिद्धियां प्राप्त की थी। यह मंदिर पहाड़ की चोटी पर स्थित है। यह मंदिर उत्तर मुखी है। यहां पर गणेशजी की 3 फीट ऊंची और ढाई फीट चौड़ी प्रतिमा है। इस प्रतीमा में गणेश जी की सूंड दांयी ओर है। इस मंदिर के लगभग दो सौ साल पुराना बताया जाता है। 

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बल्लालेश्वर मंदिर - फोटो : ashtavinayaktemples

बल्लालेश्वर मंदिर
बल्लालेश्वर मंदिर रायगढ़ के पाली गांव में स्थित है इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसका नाम गणेश जी के परम भक्त बल्लाल के नाम पर है। कथा के अनुसार बल्लाल को उसके परिवार ने गणेश जी की प्रतिमा के साथ जंगल में छोड़ दिया था। जिसके बाद उनके भक्त ने गणेश जी का स्मरण करते हुए ही बहुत समय गुजारा इससे प्रसन्न होकर इसी स्थान पर गणेश जी ने बल्लाल को दर्शन दिए थे, 

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वरदविनायक मंदिर - फोटो : ashtavinayaktemples

वरदविनायक मंदिर
बप्पा का वरदविनायक मंदिर रायगढ़ के कोल्हापुर में स्थित है, कहा जाता है कि यहां पर एक दीपक है जो कई वर्षों से लगातार प्रज्वलित है। इस दीपक को नंददीप कहा जाता है, मान्यता है कि यहां पर दर्शन करने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है। 
 

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