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Pradosh Vrat 2026: साल के पहले दिन शिव-विष्णु पूजन का दुर्लभ संयोग, गुरु प्रदोष व्रत से होगी 2026 की शुरुआत

Wed, 31 Dec 2025 12:36 PM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति मेहरा Updated Wed, 31 Dec 2025 12:36 PM IST
सार

Pradosh Vrat 2026: वर्ष के पहले ही दिन एक विशेष व्रत और शुभ वार का दुर्लभ संयोग बन रहा है। 1 जनवरी 2026, गुरुवार के दिन पड़ रहा है और इसी दिन गुरु प्रदोष व्रत भी रखा जाएगा।

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guru pradosh vrat - फोटो : Amar Ujala

Guru Pradosh Vrat 2026: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आने वाला नया साल 2026 बेहद शुभ संकेतों के साथ शुरू होने जा रहा है। दरअसल, वर्ष के पहले ही दिन एक विशेष व्रत और शुभ वार का दुर्लभ संयोग बन रहा है। 1 जनवरी 2026, गुरुवार के दिन पड़ रहा है और इसी दिन गुरु प्रदोष व्रत भी रखा जाएगा। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित माना जाता है, जबकि गुरुवार का दिन भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष फलदायी होता है। ऐसे में नए साल की शुरुआत महादेव और नारायण की कृपा से होना अत्यंत मंगलकारी माना जा रहा है।



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महादेव और नारायण की उपासना का शुभ योग - फोटो : adobe stock

महादेव और नारायण की उपासना का शुभ योग
पंचांग के अनुसार 1 जनवरी 2026 को पौष मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि रहेगी। त्रयोदशी भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष मानी जाती है और जब यह तिथि गुरुवार के दिन आती है, तो इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस व्रत का संबंध गुरु ग्रह यानी बृहस्पति से जोड़ा जाता है, जो ज्ञान, धर्म, समृद्धि और सौभाग्य का कारक माना जाता है। गुरु प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं और कई प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं।

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महादेव और नारायण की उपासना का शुभ योग - फोटो : adobe stock

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस शुभ संयोग में की गई पूजा से भक्तों को सुख-समृद्धि, मानसिक शांति, रोगों से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। माना जाता है कि गुरु प्रदोष व्रत करने से गुरु ग्रह मजबूत होता है, जिससे व्यक्ति के जीवन में ज्ञान, सम्मान और आर्थिक स्थिरता बढ़ती है। नए साल के पहले ही दिन यह व्रत पड़ना इसे और भी खास बना देता है।

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पूजा का शुभ समय और विधि - फोटो : adobe stock

पूजा का शुभ समय और विधि
1 जनवरी 2026, गुरुवार के दिन सुबह के समय भगवान विष्णु की पूजा करके नए वर्ष की शुरुआत करना उत्तम रहेगा। इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है, क्योंकि पीला रंग गुरु ग्रह और भगवान विष्णु दोनों को प्रिय है। पूजा में पीले फूल, चने की दाल, केले या पीले रंग की मिठाई का भोग अर्पित किया जा सकता है। इसके साथ ही ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।

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पूजा का शुभ समय और विधि - फोटो : adobe stock

नए साल पर शाम के समय प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करें। प्रदोष काल सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद तक माना जाता है। इस दौरान शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, भांग और फल अर्पित करें। ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें और अंत में भगवान शिव की आरती करें। ऐसा माना जाता है कि इस विधि से की गई पूजा नए साल में सुख, शांति और सफलता दिलाती है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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