ऐसा माना जाता है कि 1854 में पहली बार साईं बाबा शिरडी में दिखाई दिए। उस समय बाबा की उम्र लगभग 16 साल थी। साईं ने अपने जीवनकाल में कई चमत्कार दिखाए थे जिसकी वजह से साईं बाबा के प्रति लोगों की आस्था बढ़ रही है। खास बात ये है कि साईं बाबा की पूजा-अर्चना सिर्फ भारत ही नहीं, आज पूरी दुनिया में होती है और उनके चमत्कारों का गुणगान भी किया जाता है।
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sai baba
- फोटो : sai baba
साईं बाबा के बारे में कहा जाता है कि उनका जन्म हुआ था। वे साधारण लोगों के बीच रहकर ही साधारण जीवन जीना पसंद करते थे। यह भी कहा जाता है कि उन्होंने समाधि ली थी। सबसे खास बात है कि शिरडी के साईं बाबा को छोड़ दें, तो इसके अलावा जहां-जहां भी साईं बाबा के मंदिर बने हैं, वहां उनकी मूर्ति एक ही छवि वाली है।
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वह भी संगमरमर की मूर्ति। मान्यता है कि साईं के इस आसन वाली मूर्ति को शिरडी में ही बनाया गया था, जहां उन्होंने समाधि ली थी। इस मूर्ति की पूजा साल 1954 से लगातार की जा रही है ऐसी मूर्ति के पीछे एक गहरा राज भी छुपा है, जिसके बारे में उनके भक्तों को शायद ही पता हो।
दरअसल, लोगों का मानना है कि साईं अपने भक्तों के कष्टों को दूर करने के लिए खुद आते हैं। एक घटना खुद साईं बाबा की यह मूर्ति बनाने वाले शिल्पकार से जुड़ी है। इसके बारे में जानकर आपको भी हैरानी होगी। जी हां, जिस शिल्पकार को साईं बाबा की मूर्ति बनाने के लिए कहा गया, उसके सामने सबसे बड़ी मुश्किल यह थी कि वो मूर्ति को किस तरह की बनाए। ऐसी दुविधा में उससे कहा गया कि वो साईं बाबा को याद करके मूर्ति बनाए।
मूर्ति बनाते समय जब उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था, तब वो निराश होकर बैठ गया और कहने लगा कि बाबा मुझे इतनी शक्ति दीजिए कि मैं ऐसी प्रतिमा बनाऊं, जो मनमोहक हो। इसके बाद साईं बाबा ने खुद दर्शन दिए और जिसके बाद ये आसन वाली मूर्ति बनी। साईं बाबा की मूर्ति बनाने वाले का नाम वसंत तालीम है। मूर्ति से जुड़ी एक रहस्यमयी जानकारी यह है कि कोई आज तक कोई नहीं जानता कि साईं बाबा की मूर्ति बनाने के लिए यह पत्थर किसने भेजा था सिवाए इसके कि यह इटली से आया था।