Importance of Shankh: हिंदू परंपरा में शंख का एक विशेष आध्यात्मिक महत्व है। मान्यताओं के अनुसार देवी लक्ष्मी को शंख अत्यंत प्रिय है और लक्ष्मी-नारायण की पूजा में इसका प्रयोग आवश्यक माना जाता है। यह भी कहा जाता है कि जिस पूजा में शंख का उपयोग नहीं होता, वह पूजा देवी लक्ष्मी स्वीकार नहीं करतीं। शंख की ध्वनि को शुभ और पवित्र माना जाता है। जिस घर में नियमित रूप से शंखनाद होता है, वहां देवी लक्ष्मी का स्थायी वास बना रहता है।
धार्मिक दृष्टिकोण के अलावा वास्तु शास्त्र, योग और ध्यान की दृष्टि से भी शंख की ध्वनि को सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत माना गया है। इसकी ध्वनि वातावरण को शुद्ध करती है और मानसिक शांति और एकाग्रता को बढ़ाती है। मान्यता है कि सत्यनारायण व्रत की पूजा शंख बजाए बिना अधूरी मानी जाती है।
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शंख की उत्पत्ति कैसे हुई?
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शंख की उत्पत्ति कैसे हुई?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शंख का जन्म समुद्र मंथन के समय हुआ था। यह उन 14 रत्नों में से एक है जो समुद्र मंथन के दौरान प्राप्त हुए थे, और इसका स्थान बारहवें नंबर पर था। चूंकि समुद्र मंथन में देवता, असुर, नाग, गरुड़ और ऋषि-मुनियों की भागीदारी थी, इसलिए शंख को पांचजन्य शंख भी कहा जाता है। इसकी ध्वनि को विजय, यश और शुभता का प्रतीक माना जाता है।
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लक्ष्मी और शंख का संबंध
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लक्ष्मी जी और शंख का संबंध
शंख और देवी लक्ष्मी दोनों की उत्पत्ति समुद्र मंथन से मानी जाती है। यही वजह है कि इनमें भाई-बहन का संबंध माना जाता है। इसलिए देवी लक्ष्मी को शंख अत्यंत प्रिय है। ऐसा भी कहा जाता है कि देवी लक्ष्मी शंख में वास करती हैं।
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विष्णु भगवान और शंख का नाता
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विष्णु भगवान और शंख का नाता
शंख भगवान विष्णु का प्रमुख अस्त्र है। समुद्र मंथन से प्राप्त होने के बाद यह शंख विष्णु जी को समर्पित किया गया था और तभी से वे इसे अपने हाथ में धारण करते हैं। माना जाता है कि शंख में भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी दोनों का निवास है। शंख के जल से भगवान विष्णु का अभिषेक करने पर सभी पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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लक्ष्मी-नारायण की पूजा में शंख का महत्व
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लक्ष्मी-नारायण की पूजा में शंख का महत्व
शंख न केवल देवी लक्ष्मी का भाई है, बल्कि वह भगवान विष्णु का दिव्य शस्त्र भी है। इसी कारण यह दोनों देवताओं को अत्यंत प्रिय है। शंख को यश, समृद्धि और कल्याण का प्रतीक माना गया है। यही कारण है कि लक्ष्मी-नारायण की पूजा में शंख का स्थान अत्यंत आवश्यक और पावन माना गया है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।