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क्रांतिकारी संत श्री तरुण सागर : जिसके कड़वे प्रवचन ने घोली जीवन में मिठास

Sat, 01 Sep 2018 11:56 AM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 01 Sep 2018 11:56 AM IST
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krantikari sant tarun sagar famous by his kadve pravachan passed away
tarun sagar
अपने कड़वे प्रवचन के जरिए समाज को सधे तरीके से सद्ज्ञान देने वाले जाने-माने संत तरुण सागर नहीं रहे। धर्म-अध्यात्म की दुनिया में तमाम संतों के बीच क्रांतिकारी संत तरुण सागर की अदा अलहदा थी।
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सीकर में प्रवचन देते जैन मुनि तरुणसागर महाराज - फोटो : amar ujala

सरलता से बयां करते थे गूढ़ बात
संत श्री तरुण सागर जी के प्रवचन में जीवन की गूढ़ से लेकर सामान्य बातों का समावेश होता था। जैसे संत श्री ने संस्कारों का महत्व बताते हुए लोगों को अगाह किया कि घर में बहू लाना, बहूरानी मत लाना, क्योंकि घर में बहू आएगी तो संस्कार लेकर आएगी लेकिन बहूरानी कार लेकर आएगी। जो संस्कार लेकर आएगी वह सिर के बल चली आएगी लेकिन जो कार लेकर आएगी वह अपनी ही सरकार चलाएगी

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तरुण सागर - फोटो : self

कड़वे प्रवचन की मिठास
मुनि श्री तरुण सागर जी महाराज हमेशा कहते कि अपनी वाणी को मीठी बनाओ जिससे जीवन सुखी रहे। समाज में समरसता फैलाने वाले उनके कड़वे प्रवचन आज लोगों के बीच जीवन में मिठास घोलने का काम कर रहे हैं। 

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Tarun Sagar

सभी संतों से थी अलग अदा
लोगों का ध्यान केंद्रित करने के लिए वे महत्वपूर्ण बात को कहने के लिए अचानक से बहुत जल्दी और तेज आवाज में बोलते और उसे दोहराते थे। यही कारण था कि कोई भी व्यक्ति उनके द्वारा दिए गए सद्ज्ञान को कभी नहीं भूलता था। 

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विशाल डडलानी को लेकर जैन मुनि तरुण सागर का बयान - फोटो : अमर उजाला

अल्पायु में बनें संत
26 जून, 1967 को मध्य प्रदेश के दमोह में जन्में तरुण सागर ने 14 साल की उम्र में 8 मार्च 1981 को घर छोड़ दिया था। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ में विधिवत दीक्षा ली थी। आचार्य पुष्पदंग सागर ने दी उन्हीं दीक्षा दी। 

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