रावण के पास थी चमत्कारी शक्तियां, एक कमजोरी न होती तो बन सकता था देवलोक का स्वामी
तेज और प्रखर बुद्धि रावण
रावण के बारे में कहा जाता है उसके जैसा ज्ञानी और तेज दिमाग वाला इंसान पृथ्वी पर आज तक नहीं पैदा हुआ। ऐसी मान्यता है कि है कि रावण के दस सिर थे जिसके पीछे रावण के तेज दिमाग का तर्क दिया जाता था। दरअसल रावण के पास 10 दिमागों के बराबर उसके पास बुद्धि और कौशल था जिसकी बदौलत उसके अंदर बड़े- बड़े फैसले करने की क्षमता उसके अंदर थी।
माता सीता की खोज में लंका पहुंचे भगवान हनुमान रावण से मिलकर बहुत प्रभावित हुए। रावण के बारे उन्होंने कहा कि कहा कि सर्वगुणों से युक्त यह वीर पुरूष है और इसके अंदर देवलोक के स्वामी बनने की क्षमता है। लेकिन अंहकारी और अर्धमी होने के कारण उसने अपना सबकुछ खो दिया।
रावण के अंदर शक्ति और बुद्धि दोनों बराबर थी। एक बार अपनी शक्ति के अंहकार में वह इतना अंहकारी बन बैठा कि अपने आराध्य देव भगवान शिव की नगरी कैलाश पर्वत को ही उठा लिया था तब भगवान शिव ने अपने पैर के अंगूठे से कैलाश पर्वत का भार इतना बढ़ा दिया कि रावण का हाथ उसके नीचे दब गया। इसके बाद रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शिव तांडव स्त्रोत की रचना कर डाली जिससे भगवान शंकर प्रसन्न होकर उसको आशीर्वाद दे डाला।
ग्रहों तक को कैद करने की थी क्षमता
रावण के पास गजब की शक्तियां थी उसने न सिर्फ देवताओं का परास्त किया था बल्कि अपने तप के बल से सभी नौ ग्रहों को अपने पक्ष में कर लिया था। रावण ने शनि ग्रह को वर्षों तक अपने महल में कैद कर रखा था। सीता की खोज में हनुमानजी ने लंका पहुंचने पर शनिदेव को मुक्ति दिलाई थी।