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महाशिवरात्रि 2019 : गणेश और कार्तिक के अलावा भगवान शिव के थे 4 पुत्र और 1 पुत्री

Mon, 04 Mar 2019 03:24 PM IST
विनोद शुक्ला सुनीता कपूर
सुनीता कपूर Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 04 Mar 2019 03:24 PM IST
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mahashivratri 2019 know whole family of lord shiva and parvati
lord shiva and parvati

हम सभी भगवान शिव और पार्वती के दो पुत्र कार्तिक और गणेश की ही कथा सुनते आये हैं लेकिन शिव और पार्वती के विवाह और उनसे होने वाले पुत्र के पीछे भी रोचक कहानी हैं। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार भगवान  विष्णु का विवाह ब्रह्म देव के पुत्र भृगु की पुत्री लक्ष्मी से हुआ था। वहीं ब्रह्मा के दूसरे पुत्र दक्ष की पुत्री सती का विवाह भगवान शिव से हुआ था लेकिन सती ने आग में कूद कर स्वयं को भस्म कर लिया था। तो सवाल ये है कि शिव के पुत्र कैसे हुए? सती की मृत्यु के बाद सती ने अपना दूसरा जन्म पर्वतराज हिमालय के यहाँ उमा के रूप में लिया था, जिससे भगवान शिव का विवाह हुआ और हिमालय की पुत्री उमा ही ‘पार्वती’ के नाम से जानी गयी। शिव पार्वती के विवाह के बाद उनका गृहस्थ जीवन शुरू हुआ और उन्हें पुत्र प्राप्त हुए।

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गणेश

गणेश
भगवान गणेश के जन्म के पीछे की एक कहानी तो हम सब ने सुनी हैं कि माता पार्वती ने अपने उपटन और चन्दन के मिश्रण से गणेश की उत्पत्ति की और उसके बाद स्नान करने गयी थी। माता पार्वती ने गणेश को यह आदेश दिया था, कि स्नान करते तक वह किसी को घर में प्रवेश न करने दे। कुछ देर में भगवान शिव आये जिन्हें गणेश ने घर के भीतर जाने से रोक दिया। इस बात से क्रोधित भगवान शिव ने गणेश का सर धढ़ से अलग कर दिया। अपने पुत्र की मृत्य से पार्वती बहुत नाराज़ हुई। माता पार्वती के गुस्से को शांत करने के लिए भगवान शिव ने कटे सर की जगह हाथी के बच्चे का सर लगा कर गणेश को पुनःजीवित किया।

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Lord Shiva

कार्तिक
स्कन्द पुराण की रचना कार्तिक के चरित्र पर किया गयी थी। कहते हैं कि सती की मृत्यु के बाद भगवान शिव दुखी हो कर लम्बी तपस्या में बैठ गए थे, जिससे विश्व में दैत्यों का आतंक पूरी दुनिया में बढ़ गया था। सभी देवता इससे परेशान हो कर भगवान ब्रह्मा के पास उपाय मांगने गए उसी वक़्त ब्रह्म देव ने कहा था कि शिव और पार्वती से जन्मा पुत्र इस समस्या का समाधान करेगा और शिव पार्वती के विवाह के बाद कार्तिक का जन्म हुआ था।

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lord shiva

सुकेश
यह शिव पार्वती का तीसरे पुत्र थे। लेकिन असल में सुकेश शिव पार्वती का नहीं विदुय्त्केश और सालकंठकटा का पुत्र थे जिसे दोनों ने लावारिश छोड़ दिया था। हेती-प्रहेति नाम के दो राक्षस राज हुए थे, उसमे से हेती का पुत्र विदुय्तकेश था। भगवान शिव और पार्वती जब इस बालक को ऐसे असुरक्षित पाया तो अपने साथ ले आये और उस बालक का पालन पोषण किया था।

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lord shiva - फोटो : lord shiva

जलंधर
जलंधर भगवान शिव से निकला चौथा पुत्र था। कहते हैं कि भगवान शिव ने अपना तेज़ समुद्र में फेक दिया था जिससे जलंधर का जन्म हुआ था। उसमे भगवान शिव के समान ही शक्ति थी और अपनी पत्नी वृंदा के पतिव्रता धर्म के कारण वह इतना शक्तिशाली हो गया था कि उसने इंद्र को भी हरा कर तीनों लोकों में अपना कब्ज़ा जमा लिया था। तीन लोक के बाद उसने विष्णु को हरा कर बैकुंठ धाम पर भी अपना अधिकार चाहता था पर लक्ष्मी जी को अपनी बहन स्वीकारने के बाद वह बैकुंठ धाम से कैलाश को जीतने चला गया था। भगवानशिव और जलंधर के बीच हुए युद्ध में जब उस पर किसी तरह के वार का असर नहीं हो रहा था तब भगवान विष्णु ने जलंधर की पत्नी वृंदा का पतिव्रत धर्म तोड़ कर उसकी मृत्यु सुनिश्चित की थी।

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