Jamat ul Vida 2024: ईद-उल-फितर इस्लामिक कैलेंडर के 10वें महीने के पहले दिन मनाया जाता है। यह महीना रमजान के खत्म होने के बाद आता है। ईद से पहले रमजान के दौरान जमात-उल-विदा यानी आखिरी जुमे की नमाज का महत्व बड़ा माना गया है। 'जमात उल विदा' एक अरबी शब्द है, जिसका अर्थ है जुम्मे की विदाई यानि रमजान का आखिरी शुक्रवार या जुमा। इस्लाम धर्म में जुमा यानी शुक्रवार का दिन खास माना गया है। जब जुमा का दिन रमजान के महीने में आता है, तो उसकी खासियत और भी बढ़ जाती है। खासतौर पर आखिरी जुमा खास माना जाता है। हदीस के मुताबिक, रमजान में इबादत और नेकी के बदले 70 गुना ज्यादा सवाब मिलता है। आज रमजान का आखिरी जुमा मनाया जा रहा है, जिसे अलविदा जुमा भी कहा जाता है। तो आइए जानें इसकी खासियत क्या है।
जमात-उल-विदा : कब है रमजान का आखिरी जुमा? जानें अलविदा जुमा का इस्लाम में महत्व
अलविदा जुमा या जमात उल-विदा क्या है?
रमजान का आखिरी जुमा, अलविदा जुमा जमात उल-विदा कहलाता है। ये मुसलमान समुदाय के लिए बेहद खास होता है। रमजान में 30 दिनों तक रोजे रखे जाते हैं, यानी करीब 4 हफ्ते लोग रोजा रखते हैं, इन चार हफ्तों में जुमा तीन-चार बार आता है, लेकिन आखिरी जुमा ही खास माना जाता है। इस साल अलविदा जुमा देश में 05अप्रैल को मनाया जा रहा है।
कब है जमा उल-विदा 2024
इस साल रमजान का महीना 11 मार्च से शुरू हुआ था और 10 अप्रैल, 2024, को ईद उल-फितर मनाए जाने की उम्मीद की जा रही है। रमजान जमात उल-विदा ईद उल-फितर से पहले आखिरी शुक्रवार का दिन रमजान माह का दिन बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, ऐसे में इस पर्व के इतिहास को समझना बहुत जरूरी है। जमात उल-विदा रमजान के महीने का आखिरी शुक्रवार होता है। मुस्लिम समुदाय के लिए यह दिन बेहद महत्वपूर्ण है। इस वर्ष जमात उल-विदा का शुक्रवार, 5 अप्रैल 2024 के दिन मनाया जाएगा।
जैसा कि आप जानते हैं जमात उल-विदा दो शब्दों से मिलकर बना है पहला ‘जमात’ और दूसरा ‘उल-विदा’। यहां जमात का मतलब जुम्मा यानी शुक्रवार से है और उल-विदा का अर्थ विदाई होता है। अलविदा जुमा के दिन भी सभी का रोज़ा होता है। साथ ही यह दिन आखिरी जुमा होने के कारण बेहद ख़ास भी होता है। इस दिन लोग अल्लाह की इबादत में नमाज पढ़ते हैं। कहते हैं ऐसा करने से ज्यादा से ज्यादा सवाब मिलता है । अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हैं और गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए दुआ मांगते हैं।
हदीस के अनुसार पैगंबर मोहम्मद साहब ने जुमे के दिन को हर मुसलमान के लिए ईद का दिन बताया है। इस्लाम में माना गया है कि जुमे की नमाज से पहले पैगंबर मोहम्मद नहाकर पाक यानी साफ-सुथरे कपड़े पहनते थे, इत्र लगाते और आंखों में सुरमा लगाकर नमाज के लिए जाते थे। इसलिए हर मुसलमान जुमे की नमाज के लिए खास तरह से तैयारी करता है। इसके साथ ही इस्लाम धर्म में मान्यता है कि अल्लाह ने ‘आदम' को जुमे के दिन ही बनाया था और इसी दिन आदम ने पहली बार जन्नत में भी कदम रखा था। एक हदीस में यह भी जिक्र मिलता है कि जब जुमे का दिन आता है, तो हर मस्जिद के दरवाजे पर फरिश्ते खड़े होते हैं और जुमे की नमाज के लिए आने वाले हर शख्स का नाम भी लिखते हैं।