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Jagannath Rath Yatra 2021: अनूठी रसोई से लेकर शिखर की ध्वजा तक, जानिए जगन्नाथ मंदिर से जुड़े रहस्य

Mon, 12 Jul 2021 09:25 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद, नई दिल्ली
अनीता जैन, वास्तुविद, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 12 Jul 2021 09:25 AM IST
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jagannath rath yatra 2021 interesting facts about jagannath temple
श्री जगन्नाथ के मंदिर में स्थित रसोई दुनिया की सबसे बड़ी रसोई मानी जाती है। इसमें एक साथ 500 के करीब रसोइये और 300 के आस-पास सहयोगी भगवान के प्रसाद को तैयार करते हैं। - फोटो : अमर उजाला

उड़ीसा राज्य में स्थित पुरी में श्री जगन्नाथ मंदिर वैष्णव सम्प्रदाय का एक प्रसिद्द हिन्दू मंदिर है जो जग के स्वामी भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है। यहां श्री हरि दारुमय रूप में विराजमान हैं। वर्तमान मंदिर का निर्माण कार्य कलिंग राजा अनंतवर्मन चोडगंगदेव ने आरम्भ कराया था। 1197 में ओड़िया शासक अनंगभीमदेव ने इस मंदिर को वर्तमान रूप दिया था। मंदिर के गर्भगृह में प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां एक रत्नमंडित पाषाण चबूतरे पर गर्भगृह में स्थापित हैं। माना जाता है कि इन मूर्तियों की पूजा-अर्चना मंदिर निर्माण से कहीं पहले से की जाती रही है। कलिंग शैली में बना यह मंदिर, भारत के भव्यतम स्मारक स्थलों में से एक माना जाता है। वैसे तो भारत के बहुत सारे मंदिरों के साथ आश्चर्य जुड़े हुए हैं लेकिन जगन्नाथ मंदिर से जुड़े आश्चर्य बहुत ही अद्भुत हैं। कहते हैं प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती भगवान जगन्नाथ के इस मंदिर पर जाकर कोई भी इन आश्चर्यों को देख सकता है लेकिन बहुत प्रयासों के बाद भी अभी तक इन रहस्यों से पर्दा नहीं उठा है इनमें से कुछ इस प्रकार हैं।

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जगन्नाथ मंदिर के रहस्य
हवा के खिलाफ लहराता है झंडा
प्रभु के मंदिर के शिखर पर स्थित पवित्र ध्वज हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है। ऐसा क्यों होता है यह एक आश्चर्य बना हुआ है। एक और अद्भुत बात इस झंडे से जुड़ी हुई है वह यह कि इसे हर रोज बदला जाता है और बदलने वाला व्यक्ति भी उल्टा चढ़कर ध्वजा तक पंहुचता है। मान्यता है कि यदि एक दिन ध्वजा को न बदला जाये तो मंदिर के द्वार 18 साल तक बंद हो जाएंगे।
 
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जगन्नाथ पुरी मंदिर का सुदर्शन चक्र - फोटो : Social media

सीधा नजर आता है सुदर्शन चक्र
यहां मंदिर के शिखर पर ही अष्टधातु से निर्मित सुदर्शन चक्र है। इस चक्र को नील चक्र भी कहा जाता है और इसके दर्शन करना बहुत शुभ माना जाता है। इस चक्र की विशेषता यह है कि यदि किसी भी स्थान से या किसी भी दिशा से इस चक्र को आप देखेंगे तो ऐसा लगता है जैसे इसका मुंह आपकी तरफ हैऔर ये बिल्कुल सीधा नजर आता है।

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जगन्नाथ पुरी मंदिर का महाप्रसाद - फोटो : Social media

कम नहीं पड़ता है प्रसाद
श्री जगन्नाथ के मंदिर में स्थित रसोई दुनिया की सबसे बड़ी रसोई मानी जाती है। इसमें एक साथ 500 के करीब रसोइये और 300 के आस-पास सहयोगी भगवान के प्रसाद को तैयार करते हैं। दूसरी बात यह है कि प्रसाद पकाने के लिये सात मिट्टी के बर्तनों को एक दूसरे के ऊपर रखा जाता है और प्रसाद पकने की प्रक्रिया सबसे ऊपर वाले बर्तन से शुरू होती है। मिट्टी के बर्तनों में चूल्हे पर ही प्रसाद पकाया जाता है सबसे नीचे वाले बर्तन का प्रसाद आखिर में पकता है। हैरानी की बात यह भी है कि मंदिर में प्रसाद कभी भी कम नहीं पड़ता और जैसे ही मंदिर के द्वार बंद होते हैं प्रसाद भी समाप्त हो जाता है।

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जगन्नाथ पुरी मंदिर का ध्वज - फोटो : Social media

मंदिर के अंदर नहीं सुनाई देती लहरों की आवाज
यह भी किसी रहस्य से कम आपको नहीं लगेगा कि जगन्नाथ मंदिर में सिंह द्वार से प्रवेश करने पर आप समुद्र की लहरों की आवाज नहीं सुन सकते लेकिन मंदिर से एक कदम बाहर आते ही लहरों की ध्वनि सुनाई देने लगती है। विशेषकर शाम के समय आप इस अद्भुत अनुभव को बहुत अच्छे से महसूस कर सकते हैं।

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