उड़ीसा राज्य में स्थित पुरी में श्री जगन्नाथ मंदिर वैष्णव सम्प्रदाय का एक प्रसिद्द हिन्दू मंदिर है जो जग के स्वामी भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है। यहां श्री हरि दारुमय रूप में विराजमान हैं। वर्तमान मंदिर का निर्माण कार्य कलिंग राजा अनंतवर्मन चोडगंगदेव ने आरम्भ कराया था। 1197 में ओड़िया शासक अनंगभीमदेव ने इस मंदिर को वर्तमान रूप दिया था। मंदिर के गर्भगृह में प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां एक रत्नमंडित पाषाण चबूतरे पर गर्भगृह में स्थापित हैं। माना जाता है कि इन मूर्तियों की पूजा-अर्चना मंदिर निर्माण से कहीं पहले से की जाती रही है। कलिंग शैली में बना यह मंदिर, भारत के भव्यतम स्मारक स्थलों में से एक माना जाता है। वैसे तो भारत के बहुत सारे मंदिरों के साथ आश्चर्य जुड़े हुए हैं लेकिन जगन्नाथ मंदिर से जुड़े आश्चर्य बहुत ही अद्भुत हैं। कहते हैं प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती भगवान जगन्नाथ के इस मंदिर पर जाकर कोई भी इन आश्चर्यों को देख सकता है लेकिन बहुत प्रयासों के बाद भी अभी तक इन रहस्यों से पर्दा नहीं उठा है इनमें से कुछ इस प्रकार हैं।
Jagannath Rath Yatra 2021: अनूठी रसोई से लेकर शिखर की ध्वजा तक, जानिए जगन्नाथ मंदिर से जुड़े रहस्य
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प्रभु के मंदिर के शिखर पर स्थित पवित्र ध्वज हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है। ऐसा क्यों होता है यह एक आश्चर्य बना हुआ है। एक और अद्भुत बात इस झंडे से जुड़ी हुई है वह यह कि इसे हर रोज बदला जाता है और बदलने वाला व्यक्ति भी उल्टा चढ़कर ध्वजा तक पंहुचता है। मान्यता है कि यदि एक दिन ध्वजा को न बदला जाये तो मंदिर के द्वार 18 साल तक बंद हो जाएंगे।
सीधा नजर आता है सुदर्शन चक्र
यहां मंदिर के शिखर पर ही अष्टधातु से निर्मित सुदर्शन चक्र है। इस चक्र को नील चक्र भी कहा जाता है और इसके दर्शन करना बहुत शुभ माना जाता है। इस चक्र की विशेषता यह है कि यदि किसी भी स्थान से या किसी भी दिशा से इस चक्र को आप देखेंगे तो ऐसा लगता है जैसे इसका मुंह आपकी तरफ हैऔर ये बिल्कुल सीधा नजर आता है।
कम नहीं पड़ता है प्रसाद
श्री जगन्नाथ के मंदिर में स्थित रसोई दुनिया की सबसे बड़ी रसोई मानी जाती है। इसमें एक साथ 500 के करीब रसोइये और 300 के आस-पास सहयोगी भगवान के प्रसाद को तैयार करते हैं। दूसरी बात यह है कि प्रसाद पकाने के लिये सात मिट्टी के बर्तनों को एक दूसरे के ऊपर रखा जाता है और प्रसाद पकने की प्रक्रिया सबसे ऊपर वाले बर्तन से शुरू होती है। मिट्टी के बर्तनों में चूल्हे पर ही प्रसाद पकाया जाता है सबसे नीचे वाले बर्तन का प्रसाद आखिर में पकता है। हैरानी की बात यह भी है कि मंदिर में प्रसाद कभी भी कम नहीं पड़ता और जैसे ही मंदिर के द्वार बंद होते हैं प्रसाद भी समाप्त हो जाता है।
मंदिर के अंदर नहीं सुनाई देती लहरों की आवाज
यह भी किसी रहस्य से कम आपको नहीं लगेगा कि जगन्नाथ मंदिर में सिंह द्वार से प्रवेश करने पर आप समुद्र की लहरों की आवाज नहीं सुन सकते लेकिन मंदिर से एक कदम बाहर आते ही लहरों की ध्वनि सुनाई देने लगती है। विशेषकर शाम के समय आप इस अद्भुत अनुभव को बहुत अच्छे से महसूस कर सकते हैं।