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Guru Pradosh Vrat 2026: गुरु प्रदोष व्रत से हुई नववर्ष की शुरुआत, जानें शिव-विष्णु पूजन का महत्व

Thu, 01 Jan 2026 12:02 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Thu, 01 Jan 2026 12:02 AM IST
सार

Guru Pradosh Vrat: नए साल 1 जनवरी को पड़ रहा दुर्लभ संयोग, जब गुरुवार और प्रदोष व्रत साथ आते हैं। इस दिन शिव और विष्णु की पूजा से मिलते हैं पुण्य, समृद्धि और आध्यात्मिक लाभ।

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Guru Pradosh Vrat 1 January 2026 Significance Timings and Benefits of Shiv-Vishnu Worship for the New Year
guru pradosh vrat - फोटो : Amar Ujala

Guru Pradosh Vrat: गुरु प्रदोष व्रत 2026 इस बार नए साल की शुरुआत को बेहद शुभ बना रहा है। इसका कारण यह है कि आज 1 जनवरी 2026, यानी नए साल का दिन, गुरुवार को गुरु प्रदोष व्रत पड़ रहा है। इस दुर्लभ अवसर पर व्रत रखने से धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष लाभ प्राप्त होता है। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है, जबकि गुरुवार का दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है।


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इस संयोग के कारण इस दिन शिव और विष्णु दोनों की आराधना करने का अवसर मिलता है, जिससे पुण्य, समृद्धि और आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है। हिंदू धर्म में हर माह की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत का विधान है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और जीवन में सुख, सौभाग्य और सभी प्रकार के लाभ मिलते हैं। आइए जानते हैं कि साल 2026 का पहला प्रदोष व्रत कब रहेगा और इसका शुभ मुहूर्त और पूजा विधि क्या है।
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Guru Pradosh Vrat 1 January 2026 Significance Timings and Benefits of Shiv-Vishnu Worship for the New Year
महादेव और नारायण पूजा का दुर्लभ संयोग - फोटो : freepik.com

महादेव और नारायण पूजा का दुर्लभ संयोग
पंचांग के अनुसार, साल 2026 का पहला दिन, यानी 1 जनवरी गुरुवार को पड़ेगा। इस दिन पौष महीने के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि भी है, जो भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष महत्व रखती है। वहीं गुरुवार का दिन भगवान विष्णु की उपासना के लिए सबसे शुभ माना जाता है। गुरुवार और प्रदोष व्रत का यह संयोग इसे गुरु प्रदोष व्रत बनाता है। इस दुर्लभ अवसर पर नए साल के दिन महादेव और नारायण दोनों की पूजा की जाएगी, जिससे भक्तों को विशेष लाभ प्राप्त होते हैं। गुरु प्रदोष व्रत रखने से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसके अलावा, इस दिन बृहस्पति ग्रह (गुरु) की कृपा से ज्ञान, सुख, सौभाग्य और समृद्धि बढ़ती है। 1 जनवरी 2026 को भगवान शिव और विष्णु की पूजा का यह संयोग भक्तों के लिए रोग मुक्ति, सुख-शांति, समृद्धि और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग खोलता है।

Guru Pradosh Vrat 1 January 2026 Significance Timings and Benefits of Shiv-Vishnu Worship for the New Year
साल 2026 का पहला प्रदोष व्रत 1 जनवरी 2026 को रखा जाएगा। - फोटो : adobe stock

प्रदोष व्रत 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, पौष मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 31 दिसंबर 2025, बुधवार की रात 1:48 बजे शुरू होगी। यह तिथि अगले दिन, यानी 1 जनवरी 2026, गुरुवार की रात 10:23 बजे समाप्त होगी। इसी अनुसार, साल 2026 का पहला प्रदोष व्रत 1 जनवरी 2026 को रखा जाएगा।

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Guru Pradosh Vrat 1 January 2026 Significance Timings and Benefits of Shiv-Vishnu Worship for the New Year
इस वर्ष प्रदोष काल शाम 4:55 बजे से 6:35 बजे तक रहेगा। - फोटो : adobe stock

प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त
साल 2026 का पहला प्रदोष व्रत गुरुवार, 1 जनवरी को पड़ रहा है। इस व्रत को करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बढ़ती है और भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इसलिए इस दिन शिवजी और माता पार्वती की पूजा शुभ मुहूर्त में करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इस वर्ष प्रदोष काल शाम 4:55 बजे से 6:35 बजे तक रहेगा। इसी समय के दौरान भगवान शिव की पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है, जिससे व्रत का अधिकतम लाभ मिलता है।
 

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Guru Pradosh Vrat 1 January 2026 Significance Timings and Benefits of Shiv-Vishnu Worship for the New Year
शिवलिंग का अभिषेक गंगाजल, दूध, दही, बेलपत्र, शहद आदि से करें। - फोटो : freepik.com

पूजा विधि 

  • गुरुवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
  • घर के मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें और गंगाजल का छिड़काव करें।
  • चौकी पर साफ वस्त्र बिछाकर भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  • शिवलिंग का अभिषेक गंगाजल, दूध, दही, बेलपत्र, शहद आदि से करें। संभव हो तो रुद्राभिषेक करना अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है।
  • अभिषेक के बाद अक्षत, फूल, चंदन, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • इस दिन ‘ॐ नमः शिवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
  • शाम को प्रदोष काल में शिवजी और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा और आरती करें।
  • पूजा के अंत में भगवान को प्रसाद का भोग अर्पित करें।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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