फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

महान कवि और समाज सुधारक थे संत कबीर, मृत्यु के बाद भी दिया एकता का संदेश

Thu, 04 Jun 2020 07:51 AM IST
Shashi Shashi ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Thu, 04 Jun 2020 07:51 AM IST
विज्ञापन
Great social reformer and poet Kabir Das
कबीर जयंती 2020 - फोटो : Rohit Jha

कबीर दास जी ने अपना पूरा जीवन लोगों की भलाई के लिए समर्पित कर दिया और मृत्यु के बाद भी हिंदू और मुस्लिम धर्म में व्याप्त कुरीतियों को खत्म करने का प्रयास किया। उन्होंने अपने जीवन काल में हिन्दू और मुस्लिम को एकता में पिरोने का काम किया। वे हिन्दू-मुस्लिम धर्मों में फैली कुरीतियों के सख्त विरोधी थे। जिसके कारण दोनों ही धर्म के कुछ कट्टरपंथी लोग इनसे शत्रुता भी रखते थे। इसको लेकर कबीर ने  दोहों की रचना भी की।

Great social reformer and poet Kabir Das
साधु संतों की संगत में कबीर - फोटो : अमर उजाला

कबीर दास जी ने अपने दोहो में दोनों ही धर्म पर कटाक्ष किया था। वे रूढ़िवादिता से सदैव मानवीय गुणों को सर्वोपरि मानते थे।  
 
दुनिया बड़ी बावरी, पहार पूजन जाए।
घर की चक्की कोई न पूजे, जिसका पीसा खाए।
 
कांकर पाथर जोरि कै मस्जिद लई बनाय।
ता चढ़ि मुल्ला बांग दे क्या बहरा हुआ खुदाय।।

Great social reformer and poet Kabir Das
कबीर दास के दोहे - फोटो : social media

कबीर दास जी को लोग कबीर साहब, संत कबीर दास भी कहते हैं। कबीर दास जी के शिष्यों ने उनकी विचार धारा का प्रचार करने के लिए एक संप्रदाय का गठन किया जिसे कबीरपंथ नाम से जाना जाता  है। देश भर में करीब एक करोड़ लोग इस संप्रदाय से जुड़े हुए हैं जो कबीर के बताए हुए मार्ग पर चलते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Great social reformer and poet Kabir Das
कबीर

कबीर के जन्म स्थान के विषय में विद्वानों में मतभेद हैं। लेकिन ज्यादातर लोग इनका जन्म काशी में ही मानते हैं। कबीर के जन्म के विषय में भी कई किवदंतिया हैं कहते हैं कि ऋषि रामानंद के आशीर्वाद से इनका जन्म एक विधवा ब्राह्मणी के गर्भ से हुआ था जो लोक-लाज के डर से इन्हें लहर तारा तालाब के किनारे फेंक गई थी जहां से इन्हें नीमा और नीरू नाम के जुलाहे ले आए और इनका पालन पोषण किया। तो वहीं कुछ लोगों का मानना है कि कबीर जन्म से ही मुस्लिम थे।

विज्ञापन
Great social reformer and poet Kabir Das
कबीर दास जयंती 2020 - फोटो : social media

कबीर जी अपने पूरे जीवन में समाज की सेवा में ही लगे रहे और अपने अंत समय में भी लोगों में व्याप्त अंधविश्वास को खत्म करने का प्रयास किया। उस समय समाज में यह अंधविश्वास था कि मगहर में मरने वालों को नरक में जाना पड़ता है इस अंधविश्वास को दूर करने के लिए कबीर अपने जीवन के अंत समय में मगहर चले गए।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed