हम और आप सभी ईश्वर से अपने और घर-परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इसके लिए आप अपने कार्य के अलावा भगवान की पूजा-अर्चना भी करते है। मन को एकाग्र और विशेष कार्य की पूर्ति के लिए हम मंत्र जाप करते हैं। मंत्र जाप का पूरा फल मिले इसके लिए हम अलग-अलग प्रकार की मालाओं का प्रयोग करते हैं। माला का उपयोग इसलिए भी किया जाता है ताकि मंत्र जप की संख्या में कोई त्रुटि न हो सके। माला में लगे हुये दानों को मनका कहा जाता है, आमतौर पर माला में 108 मनके होते हैं परन्तु कभी कभी इसमें 27 अथवा 54 मनके भी होते हैं। आइए जानते हैं किस माला का प्रयोग किस देवता के लिए किया जाता है।
मनोकामना की पूर्ति के लिए किस देवी-देवता की पूजा में कौन सी माला का करें उपयोग
रुद्राक्ष की माला
रुद्राक्ष भगवान शंकर का अंश माना जाता है। इसलिए शिवजी और शिव परिवार में विराजित सभी देवताओं को प्रसन्न करने के लिए रुद्राक्ष की माला से जप करना विशेष लाभकारी होते हैं। महामृत्युंजय और लघुमृत्युंजय मन्त्र केवल रुद्राक्ष पर ही जपना चाहिए।
स्फटिक की माला
बर्फ की तरह सफेद पारदर्शी मोती की यह माला एकाग्रता,सम्पन्नता और मन की शान्ति देने वाली मानी जाती है।श्री गणेश,माँ सरस्वती और माँ लक्ष्मी के मंत्र इस माला से जपना फलदाई है। धन प्राप्ति और एकाग्रता के लिए स्फटिक की माला धारण करना भी लाभ देता है।
हल्दी की माला
विशेष उद्देश्य की पूर्ती तथा मनोकामनाओं के लिए हल्दी की माला का प्रयोग किया जाता है। बृहस्पति देव तथा माँ बगलामुखी के मन्त्रों के लिए पीली हल्दी की माला का प्रयोग किया जाना शुभ होता है।वही काली माता की पूजा में काली हल्दी की माला का प्रयोग उत्तम रहता है। हल्दी की माला से ज्ञान और संतान प्राप्ति के मन्त्रों का जाप भी कर सकते हैं।
चन्दन की माला
लाल और श्वेत चन्दन से बनाई जाने वाली चन्दन की माला बहुत शुभ होती है। देवी मां के मन्त्रों का जाप लाल चन्दन की माला से करना फलदायी होता है वहीं भगवान कृष्ण और विष्णुजी के मन्त्रों के लिए सफेद चन्दन की माला का प्रयोग अच्छा माना गया है।