फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत के दौरान अर्जुन को दिया था ये उपदेश

Sat, 24 Aug 2019 10:33 AM IST
प्रशांत राय धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत राय Updated Sat, 24 Aug 2019 10:33 AM IST
विज्ञापन
gita preaches janmashtami geeta quotes in hindi
krishna - फोटो : social media

महाभारत के युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया, जिसके बाद धुनर्धर अर्जुन ने महाभारत के युद्ध में ल़ड़ना शुरू किया। भगवान श्रीकृष्ण को भविष्य में होने वाले बुरी चीजों के बारे में पहले से ही पता था, जिसके जरिए उन्होंने अर्जुन को माध्यम बनाकर सभी मानव जाति के कल्याण के लिए उपदेश दिया था। गीता के इन उपदेशों के जरिए कोई भी व्यक्ति अपने जीवन की सारी मुश्किलों को दूर कर सकता है। 

gita preaches janmashtami geeta quotes in hindi
krishna - फोटो : social media

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भुर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि ॥

इस उपदेश का अर्थ यह है कि भविष्य का चिंता किए बिना जो आप काम कर रहे हैं उसे पूरी दृढ़ता से करते रहना चाहिए। अगर हम मौजूदा वक्त पूरी मेहनत और लगन के साथ काम करेंगे तो आपका भविष्य जरूर बेहतर होगा। 

gita preaches janmashtami geeta quotes in hindi
lord krishna - फोटो : Social Media

यो न हृष्यति न द्वेष्टि न शोचति न काङ्क्षति ।
शुभाशुभपरित्यागी भक्तिमान्यः स मे प्रियः ॥

कोई भी खास काम के सफल होने पर ज्यादा उत्साहित नहीं होना चाहिए। ऐसा करने से गलती के होने की आशंका बढ़ जाती है। साथ ही हमें किसी दूसरे से जलन की भावना भी नहीं रखनी चाहिए। 

विज्ञापन
विज्ञापन
gita preaches janmashtami geeta quotes in hindi
lord krishna - फोटो : pixabay

न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत् ।
कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः ॥

इस पंक्ति का यह अर्थ है कि हर इंसान के लिए कोई ना कोई काम जरूर है, जो कि वह करने के लिए बाध्य है। हर इंसान में कोई ना कोई खूबी जरूर होती है। बस जरूरत होती है अपने अंदर छिपे हुए हुनर को पहचानने की। जिसके हिसाब से वह व्यक्ति काम कर सके। 

विज्ञापन
gita preaches janmashtami geeta quotes in hindi
भगवान कृष्ण - फोटो : Social media

कर्मेन्द्रियाणि संयम्य य आस्ते मनसा स्मरन्।
इन्द्रियार्थान्विमूढात्मा मिथ्याचारः स उच्यते॥

इस पंक्ति का यह अर्थ है कि जो व्यक्ति केवल बाहर से ही यह दिखाता है कि वह अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण कर चुका है. लेकिन अगर उसका मन से अंदर से चलयामान होता है तो वह व्यक्ति सबेस झूठा और कपटी होता है। 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed