सोमवार को भगवान बदीनाथ के कपाट आम दर्शनों के लिए खुल जाएंगे। इससे पहले भगवान विष्णु के धाम बदरीनाथ के बारे में जानिए कुछ अनकही बातें...
सबसे पहले तो ये कि, बदीनाथ धाम के बारे में आज तक ऐतिहासिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। सिर्फ वेदों में ही बदरीनाथ धाम का उल्लेख मिलता है। उत्तराखंड के चमोली जिले में नारायण पर्वत पर अलकनंदा नदी की गोद में यह मंदिर बना है। जहां गर्म पानी का कुंड (तप्त कुंड) है। जिसमें हमेशा गर्म पानी रहता है।
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Snowfall in badrinath
- फोटो : amar ujala
बताया जाता है कि बदरीनाथ धाम के इस मंदिर से पहले राजा अशोका के शासन के दौरान यहां बौद्घ मंदिर हुआ करता था। इसके बाद गुरु शंकराचार्य ने नारद कुंड से भगवान बदरीनाथ की मूर्ति निकालकर यहां आठवीं सदी में इस मंदिर की स्थापना की थी। भगवान बदरीनाथ (श्री विष्णु) की मूर्ति काले पत्थर शालीग्राम से बनी हुई है और पदमासन में विराजमान है।
बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने और खुलने के दिन रावल साड़ी पहन कर पार्वती का श्रृंगार करके ही गर्भगृह में प्रवेश करते हैं। मान्यता यह कि उद्धव ही कृष्ण के बाल सखा है और उम्र में बड़े, इसलिए लक्ष्मी जी के जेठ हुए। हिन्दू परंपरा के अनुसार जेठ के सामने बहू नहीं आती है। इसलिए पहले जेठ बाहर आयेंगे तब लक्ष्मी को विराजा जाएगा।
धाम के मंदिर के गर्भगृह में भगवान की मूर्ति, मंडप में पूजा और सभा मंडप में भक्तों के दर्शन के लिए रखा जाता है। धाम में नर-नारायण विग्रह की पूजा होती है और अखंड दीप जलता है। यह दीप कभी नहीं बुझता है।