चारधाम यात्रा शुरू हो चुकी है। लेकिन बाबा केदार के दर्शन से पहले इन चमत्कारों के बारे में जानिए। इसके बाद आपका विश्वास बाबा पर और भी अटूट हो जाएगा।
बाबा के इस धाम में साल 2013 में आई आपदा के दौरान सबसे बड़ा चमत्कार देखने को मिला। जिसने देश और दुनिया को हिला कर रख दिया। जिस वक्त जल प्रलय आई और तीर्थयात्रियों समेत वहां की एक-एक चीज को बहा ले गई उस वक्त बाबा के मंदिर में खंरोच भी नहीं आई। एक बड़ी चट्टान मंदिर के पीछे उस पानी के साथ आई और मंदिर के थोड़ी सी पीछे रुक गई। वहीं यह सैलाब आस्था की सबसे बड़ी नींव यानी केदारनाथ मंदिर को हिलाने में नाकामयाब रहा। मंदिर का शिवलिंग और नंदी की मूर्ति वहीं बिल्कुल वैसे ही थी जैसे तबाही से पहली थी।
दूसरा से कि साल 2017 में जब मंदिर के कपाट बंद किए गए तो वहां गर्भगृह के कपाट बंद करने में खासी दिक्कतें हुई। दरवाजे के कुंडे नहीं लग पाए। लाख कोशिशों के बाद भी दरवाजे के कुंडे नहीं लग पाए। उस वक्त मंदिर के दरवाजों पर चांदी लगाई गई थी। इसलिए वह बंद नहीं हो पा रहे थे। लेकिन तभी वहां क्षेत्रपाल भकुंड भैरव का आह्वान किया गया। इसके बाद प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक वहां देवता द्वारा कुंड को स्पर्श करते ही वह दूसरे कुंडे पर जुड़ गया।
वहां के शिवलिंग में भी लोग असीम शक्तियां मानते हैं। केदारनाथ धाम में भगवान शिव के दर्शनार्थ गए लोग अक्सर मंदिर के गर्भगृह में महसूस होने वाली असीम शक्ति की बात करते हैं। शिवलिंग की आलौकिक ऊर्जा इस धाम को विशेष बनाती है। इस ऊर्जा को कई बार यहां आने वाले भक्तों ने भी महसूस किया गया है। मान्यता है कि केदारनाथ धाम में मात्र भगवान शिव का नाम जपने से ही आत्मा तृप्त होती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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brahma kamal the lotus of lord brahma
हाल ही में केदारनाथ में ऐसी घटना घटी जिसने सबको सोच में डाल दिया। जून के महीने में वहां ब्रह्मकल खिल गया। पुलिस का कहना था कि यह पहला मौका है, जब जून माह के पहले पखवाड़े में क्षेत्र में यह उच्च हिमालयी पुष्प खिला हो। वैसे यह पुष्प जुलाई-अगस्त में खिलता है। बताया जाता है कि केदारनाथ के कपाट खुलने के मौके पर ब्रह्मकमल से ही उनका पूजन होता है।