Chaturmas 2023: इस साल 30 जून को देवशयनी एकादशी है। देवशयनी एकादशी से आने वाले चार महीनों तक सृष्टि के संचालक भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। इस चार माह की अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। इस साल अधिक मास लगने की वजह से चातुर्मास पांच माह तक चलेंगे। चातुर्मास की अवधि के दौरान किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। चार माह की योग निद्रा के बाद जब कार्तिक माह में देवोत्थान एकादशी पर भगवान विष्णु जागकर पुनः इस लोक में वापस आते हैं और तुलसी जी के साथ उनका विवाह होता है, उसके बाद से सभी मांगलिक कार्य फिर से प्रारंभ हो जाते हैं। हिंदू धर्म में चातुर्मास की अवधि को बेहद खास माना गया है। मान्यता है कि इस दौरान सृष्टि का संचालन भगवान शिव के हाथों में होता है। ऐसे में इस दौरान कुछ कार्य करने से श्री हरि विष्णु के साथ शिव जी का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। वहीं इस दौरान कुछ कार्य करने से बचना चाहिए। चलिए जानते हैं चातुर्मास में कौन से कार्य करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं...
Chaturmas 2023: शुरू होने वाले हैं चातुर्मास, क्या करें और क्या नहीं?
चातुर्मास में क्या करें?
चातुर्मास में ज्यादा से ज्यादा भक्ति, भजन आदि में समय व्यतीत करना चाहिए। साथ ही इस दौरान सत्यनारायण भगवान की कथा सुनने से भी बहुत लाभ होता है।
चातुर्मास में प्रतिदिन सूर्योदय से पूर्व उठना चाहिए और स्नान करके श्री हरि विष्णु की पूजा करनी चाहिए। मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास में ब्रह्मचर्य का पालन करना और दिन में केवल एक बार भोजन करना चाहिए। दरअसल कहा जाता है कि व्यक्ति की सावन, भादो, आश्विन और कार्तिक इन चार माह में पाचन शक्ति कमजोर होती है। इसलिए एक समय ही भोजन करना चाहिए।
चातुर्मास में शिव जी और श्री हरि विष्णु की पूजा करनी चाहिए। साथ ही इस दौरान आप विष्णु सहस्रनाम और शिव चालीसा का पाठ कर सकते हैं। ऐसा करने से भगवान विष्णु और शिव जी की कृपा प्राप्त होती है और आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।
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चातुर्मास में पांच प्रकार के दान करने का महत्व होता है। चातुर्मास में अन्न और वस्त्र का दान करें। धार्मिक शास्त्रों में दीप दान करने का भी उल्लेख है। इसके अलावा किसी मंदिर में जाकर सेवा दान करें।