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Origin Of Moon: चंद्रमा की उत्पत्ति कैसे हुई, क्या कहते हैं पुराण? जानें उनके जन्म से जुड़ी यह पौराणिक कथा

Tue, 22 Aug 2023 03:53 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Tue, 22 Aug 2023 03:53 PM IST
सार

अंतरिक्ष की दुनिया में भारत ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, इसरो ने अपने तीसरे चंद्र मिशन, चंद्रयान-3 को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है।

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chandrayaan-3 Chandrama ki Utpatti Moon Birth Story in hindi
चंद्रमा की उत्पत्ति - फोटो : Amarujala

Moon Birth Story:अंतरिक्ष की दुनिया में भारत ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, इसरो ने अपने तीसरे चंद्र मिशन, चंद्रयान-3 को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। चांद पर कदम रखने वाला ये हिंदुस्तान का तीसरा सबसे बड़ा मिशन है। चांद पर जाना हमारे लिए किसी बड़ी कामयाबी से कम नहीं है। वहीं हिंदू धर्म में चांद को अधिक महत्वपूर्ण माना गया है। साथ ही कई तीज त्योहारो में चंद्रमा की पूजा भी की जाती है। खास बात ये है कि, पूर्णिमा के दिन चांद के दर्शन करना शुभ माना जाता है। ज्योतिष में तो चंद्रमा का महत्वपूर्ण स्थान है। दिन-रात, महीना-साल, प्रतिपदा से लेकर अमावस्या पूर्णिमा सब तिथियां चंद्रमा पर निर्भर करती हैं। कहा जाता है कि, चंद्रमा नवग्रहों में से एक है, जिसकी उत्पत्ति को लेकर पौराणिक ज्ञान विज्ञान से अलग मत रखता है। इसी कड़ी में हम आपको चंद्रमा की उत्पत्ति के बारे में विस्तार से बताने वाले है।

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चंद्रमा की उत्पत्ति - फोटो : iStock

ऐसे हुई चंद्रमा की उत्पत्ति
अग्नि पुराण के अनुसार माना जाता है कि, जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी, तो सबसे पहले मानस पुत्रों को बनाया था। उनमें से एक मानस पुत्र ऋषि अत्रि का विवाह ऋषि कर्दम की कन्या अनुसुइया से हुआ और चंद्रमा उन्हीं की संतान हैं। पद्म पुराण के अनुसार,  ब्रह्मा ने अपने मानस पुत्र अत्रि को सृष्टि का विस्तार करने की आज्ञा दी थी। उनकी आज्ञा पाकर महर्षि अत्रि ने एक तप प्रारंभ किया। तप काल में एक दिन महर्षि की आंखो से जल की कुछ बूंदें गिरी जो काफी प्रकाशमय थी।

तब दिशाओं ने स्त्री रूप में आ कर पुत्र प्राप्ति की इच्छा से उन बूंदों को ग्रहण कर लिया। लेकिन उन बूंदो को दिशाएं धारण न कर सकी और उन्हें त्याग दिया। उस त्यागे हुए गर्भ को ब्रह्मा ने चंद्रमा के नाम से प्रख्यात किया। स्कन्द पुराण के अनुसार देवों और असुरों ने मिलकर जब सागर मंथन किया तब चौदह रत्न निकले थे। चंद्रमा उन्हीं चौदह रत्नों में से एक है। 

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चंद्रमा का विवाह - फोटो : iStock
27 कन्याओं से हुआ चंद्रमा का विवाह
पुराणों के अनुसार माना जाता है कि, चंद्रमा का विवाह दक्ष प्रजापति की 27 कन्याओं से हुआ था। जिनका नाम रोहिणी, रेवती, कृतिका, मृगशिरा, आद्रा, पुनर्वसु, मेघा, स्वाति, चित्रा, फाल्गुनी, हस्ता, राधा, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूला, सुन्निता, पुष्य अश्व्लेशा, अषाढ़, अभिजीत, श्रावण, सर्विष्ठ, सताभिषक, प्रोष्ठपदस, अश्वयुज और भरणी हैं। माना जाता है कि, इन कन्याओं के नाम पर ही 27 नक्षत्र बताए गए हैं। चंद्रमा जब 27 नक्षत्रों का चक्कर लगा लेता है, तब एक मास पूरा होता है। 
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