Chandra Dosh: चंद्रमा का महत्व सिर्फ वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में ही नहीं बल्कि धार्मिक और ज्योतिष दृष्टिकोण में भी महत्वपूर्ण है। सनातन धर्म में कोई भी तीज त्योहार बिना चंद्रमा पूजन के नहीं होता। करवा चौथ इसमें मुख्य रूप से शामिल है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, चांद निकलने के बाद ही सुहागन महिलाएं अपने व्रत को पूर्ण मानती है। वहीं पूर्णिमा के दिन चंद्र दर्शन करने को भी कई धार्मिक महत्व से जोड़ा गया है। कहा जाता है कि, इस दिन चांद के दर्शन करने से जीवन में सुख समृद्धि बनी रहती है। पर क्या आप जानते है, हिंदू कैलेंडर में एक ऐसा भी दिन है जब चांद के दर्शन करना अशुभ माना गया है। दरअसल, साल में एक बार आने वाली भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन करना अशुभ माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि, इस दिन चंद्रमा को देखने से व्यक्ति पर झूठे कलंक लगते हैं। इसी कड़ी में आइए जानते हैं कि, आखिर क्यों इस दिन चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए।
Chandra Dosh: गणेश जी ने चंद्रमा को दिया था श्राप, जिससे चंद्र देव ने खो दी अपनी चांदनी
चंद्रमा का महत्व सिर्फ वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में ही नहीं बल्कि धार्मिक और ज्योतिष दृष्टिकोण में भी महत्वपूर्ण है। सनातन धर्म में कोई भी तीज त्योहार बिना चंद्रमा पूजन के नहीं होता। करवा चौथ इसमें मुख्य रूप से शामिल है।
गणेश चतुर्थी पर क्यों नही करते हैं चंद्रदर्शन ?
पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि, जब माता पार्वती के आदेशनुसार गणेश जी मुख्य द्वार पर पहरा दे रहे थे। तब भगवान शिव वहां पर आये और भीतर जाने के लिए कदम बढ़ाने लगे। वहां मौजूद गणेश जी ने शिव जी को अदंर जाने से रोका। लेकिन फिर भी भगवान शिव बार-बार अदंर जाने की जिद करने लगे। गणेश जी के समझाने पर भी भगवान शिव नही मानें। अंत में गुस्साए शिव जी ने गणेश जी का सिर काट दिया। उसी समय माता पार्वती वहां आ गई। माता पार्वती ने शिव जी को बताया कि, ये पुत्र गणेश हैं। आप शिघ्र ही उन्हें पुन: जीवित करें। तब शिव जी ने गणेश जी को गजानन मुख प्रदान कर जीवन दान दिया।
दोबारा जीवन पाने पर सभी देवता गणेश जी को आशीर्वाद दे रहे थे। हालांकि, वहां मौजूद चंद्र देव खड़े होकर मुस्करा रहे थे। तब गणेश जी समझे कि ये चंद्रदेव उनके गजानन मुख को देखकर हंसी उड़ा रहें हैं। इस बात से नराज गणेश जी ने चंद्र देव को श्राप दे दिया कि, 'तुम हमेशा के लिए काले हो जाओगे'। गणेश जी के इस श्राप से चंद्र देव काले हो गए। तब चंद्र देव को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने भगवान गणेश से क्षमा मांगी तो गणेश जी ने कहा कि, सूर्य का प्रकाश पाकर तुम एक दिन पूर्ण हो जाओगे, लेकिन चतुर्थी का ये दिन तुम्हें दंड देने के लिए हमेशा याद किया जाएगा। गणेश जी ने ही चंद्रमा को श्राप दिया था कि जो कोई व्यक्ति भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन तुम्हारे दर्शन करेगा, उस पर झूठा आरोप लगेगा।
क्या आप जानते हैं भगवान श्रीकृष्ण ने भी चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन किया था। इस कारण उनके उपर मणिचोरी का झूठा आरोप लगा था। इसलिए भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को 'कलंक चतुर्थी' भी कहा जाता है। यही कारण है कि, इस दिन चंद्र दर्शन करने से सभी को मना किया जाता है।
यदि आपसे भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन हो जाए, तो आप इस मंत्र को जप सकते हैं। माना जाता है कि, इस मंत्र को जपने से कलंक नहीं लगता
सिंहः प्रसेन मण्वधीत्सिंहो जाम्बवता हतः।
सुकुमार मा रोदीस्तव ह्मेषः स्यमन्तकः।।
हम सभी जानते है कि, भगवान गणेश को सिंदूर अधिक प्रिय है। इसलिए आप पूजा के समय गणेश जी को लाल रंग के सिंदूर का तिलक अवश्य लगाएं। इसके अलावा कष्टों से निवारण और शत्रु बाधा से बचने के लिए 'ॐ गं गणपतये नमः' का पाठ करना उत्तम रहता है।