आचार्य चाणक्य केवल धन या किताबी ज्ञान को ही महत्वपूर्ण नहीं मानते हैं बल्कि उनका कहा था कि आत्म संतुष्टि से सच्चा सुख होता है। आत्मिक शांति से बढ़कर मनुष्य के लिए जीवन में कोई सुख नहीं रहता है। व्यक्ति को आत्मिक शांति अच्छे कार्यों को करने से मिलती है। आचार्य चाणक्य के अनुसार मनुष्य को यह जीवन श्रेष्ठ कार्य करने के लिए मिला है। प्रत्येक मनुष्य को अपने मन में दूसरों के प्रति परोपकार की भावना रखनी चाहिए और अपने जीवन में नेक और अच्छे कार्य करने चाहिए। व्यक्ति के द्वारा किए गए अच्छे और बुरे कर्मों के अनुसार ही व्यक्ति को याद रखा जाता है। आचार्य चाणक्य ने कुछ ऐसे कार्यों के बारे में बताया है, जिन्हें निरोगी काया रहते हुए कर लेना चाहिए। जानते हैं वे कौन से कार्य हैं।
चाणक्य नीति: जब तक शरीर है निरोगी और मृत्यु दूर, समय रहते कर कर लें ये काम
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shashi Shashi
Updated Tue, 02 Mar 2021 11:12 AM IST
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