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Chaitra Navratri 2022 : देवी दुर्गा के 9 स्वरूपों के इन 9 मंत्रों का जाप करने से पूर्ण होंगी मनोकामनाएं,मिलेगी भगवती की कृपा
Tue, 05 Apr 2022 07:29 AM IST
विनोद शुक्ला
अनीता जैन ,वास्तुविद
अनीता जैन ,वास्तुविद
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 05 Apr 2022 07:29 AM IST
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नवरात्रि 2022 : नौ दिन माता के भक्त दुर्गाजी के नौ स्वरूपों की उपासना बड़े ही श्रद्धा भाव से करते हैं,मंत्र भी बोलते हैं।
- फोटो : amar ujala
02 अप्रैल से मां आदिशक्ति की उपासना का उत्सव यानी नवरात्रि का शुभारंभ हो चुका है। भगवती दुर्गा की पूजा वैदिक काल से चली आ रही है। विभिन्न युगों में विविध रूपों को धारण करने वाली भगवती दुर्गा के अवतरण का मुख्य उद्धेश्य समाज और राष्ट्र को अव्यवस्थित करने वाली आसुरी शक्तियों का दमन कर प्रजा के मन में दया, धर्म, धैर्य, विद्या, बुद्धि, क्षमा और अक्रोध रूपी धर्म को धारण कराना है। देवी दुर्गा के नौ रूप है।
शैलपुत्री
- फोटो : amar ujala
1.प्रथम मां शैलपुत्री-
स्तवन मंत्र-
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
स्तवन मंत्र-
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
ब्रह्मचारिणी
- फोटो : amar ujala
2. द्वितीय माँ ब्रह्मचारिणी-
स्तवन मंत्र-
दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मई ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
स्तवन मंत्र-
दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मई ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
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देवी चंद्रघंटा
- फोटो : अमर उजाला
3.तृतीय माँ चंद्रघंटा-
स्तवन मंत्र-
पिंडजप्रवरारूढा, चंडकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं, चंद्रघंटेति विश्रुता।।
स्तवन मंत्र-
पिंडजप्रवरारूढा, चंडकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं, चंद्रघंटेति विश्रुता।।
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मां कुष्मांडा
- फोटो : amar ujala
4. चतुर्थ माँ कुष्मांडा-
स्तवन मंत्र-
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
स्तवन मंत्र-
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥