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चैत्र नवरात्रि 2018: पहले दिन मां शैलपुत्री की ऐसे करें पूजा, जागृत होती हैं शक्तियां

Sun, 18 Mar 2018 09:25 AM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Updated Sun, 18 Mar 2018 09:25 AM IST
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chaitra navratri 2018 worship of maa shailputri and get blessing

रविवार,18 मार्च से चैत्र नवरात्रि का त्योहार शुरू हो रहा है। नवरात्रि में मां के नौ स्वरुपों की पूजा की जाती है। मां दुर्गा के नौ रूप होते हैं। मां का पहला स्वरूप शैलपुत्री के नाम से जानी जाती है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के समय मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की आराधना की जाती है। पर्वतराज हिमालय के घर पर पुत्री रूप में जन्म लेने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। मां शैलपुत्री दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प लिए हुए हैं। नवदुर्गाओं में मां शैलपुत्री का महत्व और शक्तियां अनन्त हैं।

chaitra navratri 2018 worship of maa shailputri and get blessing

मां की सहज भाव से भी पूजन करने पर शीघ्र प्रसन्न हो जाती हैं और भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करती हैं। शैलपुत्री का पूजन करने से ‘मूलाधार चक्र’जागृत होता है और यहीं से योग साधना आरंभ होती है, जिससे अनेक प्रकार की शक्तियां प्राप्त होती हैं। इसलिए नवरात्र के प्रथम दिन की उपासना में साधक अपने मन को ‘मूलाधार’ चक्र में स्थित करते हैं।

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नवरात्र के प्रथम दिन स्नान-ध्यान करके माता दुर्गा, भगवान गणेश, नवग्रह कुबेरादि की मूर्ति के साथ कलश स्थापन करें। कलश के ऊपर रोली से ॐ और स्वास्तिक लिखें। कलश स्थापन के समय अपने पूजा गृह में पूर्व के कोण की तरफ अथवा घर के आंगन से पूर्वोत्तर भाग में पृथ्वी पर सात प्रकार के अनाज रखें। इसके उपरांत कलश में गंगाजल, लौंग, इलायची, पान, सुपारी, रोली, कलावा, चंदन, अक्षत, हल्दी, रुपया, पुष्पादि डालें। फिर 'ॐ भूम्यै नमः' कहते हुए कलश को सात अनाजों सहित रेत के ऊपर स्थापित करें।

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chaitra navratri 2018 worship of maa shailputri and get blessing

कलश पूजन के बाद नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे!' से सभी पूजन सामग्री अर्पण करते हुए मां शैलपुत्री की पूजा करें। मनोविकारों से बचने के लिए मां शैलपुत्री को सफेद कनेर का फूल भी चढ़ा सकते हैं। मंत्र- या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।  नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। अथवा वन्दे वांछितलाभाय चन्दार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्। मंत्र का जाप करें।

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