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Bhishma Ashtami 2021: इस दिन त्यागा था, गंगा पुत्र भीष्म ने अपना शरीर, जानिए भीष्म अष्टमी महत्व और तिथि

Tue, 02 Feb 2021 10:46 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Tue, 02 Feb 2021 10:46 AM IST
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Bhishma ashtami 2021 date time significance and vrat tarpan vidhi
भीष्म पितामह - फोटो : you tube

माघ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के भीष्म अष्टमी के नाम से जाना जाता है। इस तिथि को बेहद ही शुभ और भाग्यशाली तिथि माना गया है। महाभारत ग्रंथ के अनुसार कौरवो और पांडवों के पितामाह भीष्म को वरदान प्राप्त था कि वे अपनी इच्छानुसार शरीर त्यागने का समय चुन सकते हैं। भीष्म पितामाह ने माघ मास में उत्तरायण के समय को अपनी मृत्यु के लिए स्वयं चुना था। माना जाता है कि जिस दिन भीष्म पितामाह ने अपना शरीर त्यागा थी वह माघ मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि थी। इस बार भीष्म अष्टमी 19 फरवरी दिन शुक्रवार को पड़ रही है। तो चलिए जानते हैं इस दिन का महत्व और तिथि आरंभ एवं समाप्ति समय

Bhishma ashtami 2021 date time significance and vrat tarpan vidhi
भीष्म पितामह - फोटो : Social Media
भीष्म अष्टमी शुभ मुहूर्त

19 फरवरी 2021 दिन शुक्रवार

अष्टमी तिथि आरम्भ- 19 फरवरी 2021 दिन शुक्रवार को सुबह 10 बजकर 58 मिनट से

अष्टमी तिथि समाप्त- 20 फरवरी 2021 दिन शनिवार दोपहर 01 बजकर 31 मिनट तक

Bhishma ashtami 2021 date time significance and vrat tarpan vidhi
भीष्म
भीष्म अष्टमी का महत्व

भीष्म अष्टमी को बहुत ही भाग्यशाली तिथि माना जाता है। पितृ दोष निवारण के लिए यह दिन बहुत उत्तम माना जाता है। भीष्म गंगा पुत्र थे। उन्होंने भगवान परशुराम से शस्त्र विद्या की शिक्षा प्राप्त की थी, जिसके कारण वे अजेय थे। मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से अच्छे चरित्र और आज्ञाकारी संतान की प्राप्ति होती है। संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वालों को लिए यह तिथि बहुत शुभ मानी गई है। पौराणिक मान्यता के अनुसार भीष्म कोई साधारण मनुष्य नहीं बल्कि देवता वसु थे। इस दिन व्रत और पूजन करने से भीष्म पितामाह का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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Bhishma ashtami 2021 date time significance and vrat tarpan vidhi
भीष्म पितामह - फोटो : social media
भीष्म अष्टमी व्रत विधि

 

भीष्म अष्टमी को प्रातः किसी नदि या सरोवर नें स्नान करना चाहिए। यदि संभव न हो तो घर पर ही स्नान करें।

 

इस दिन तर्पण करने के बहुत महत्व माना गया है। इस दिन भीष्म पितामह के निमित्त तर्पण करना चाहिए।

 

स्नान करने के पश्चात हाथ में तिल, जल आदि लेकर आदि लेकर यदि धारण करते हैं तो जनेउ को दाएं कंधे पर लेकर दक्षिणाभिमुख होकर तर्पण करना चाहिए। 


तर्पण के समय इस मंत्र का जाप करें।

 

वैयाघ्रपदगोत्राय सांकृत्यप्रवराय च।

गंगापुत्राय भीष्माय सर्वदा ब्रह्मचारिणे।।

भीष्म: शान्तनवो वीर: सत्यवादी जितेन्द्रिय:।

आभिरभिद्रवाप्नोतु पुत्रपौत्रोचितां क्रियाम्।।

 

विधि पूर्वक तर्पण करने के बाद पुन: जनेऊ को बाएं कंधे पर ले लें और गंगापुत्र भीष्म को अर्घ्य दें।

 

पौराणिक मान्यता के अनुसार जो व्यक्ति विधिपूर्वक इस दिन भीष्मपितामह के निमित्त तर्पण करता है उसके पूरे वर्ष के पापों का नाश होता है।

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