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Kalashtami 2021: इस दिन है भगवान भैरव की पूजा का दिन, जानिए तिथि-शुभ मुहूर्त और महत्व

Tue, 02 Feb 2021 07:22 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Tue, 02 Feb 2021 07:22 AM IST
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Kalashtami February 2021 date significance time and puja vidhi
kalashtami

हिंदू कैलेंडर के हिसाब से हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। माघ माह में कालाष्टमी 4 फरवरी दिन गुरूवार को पड़ रही है। इस दिन भगवान शिव के रौद्र रूप, कालभैरव भगवान की पूजा अर्चना करने का विधान है। ये तिथि भगवान भैरव को समर्पित होने के कारण इसे भैरवाष्टमी भी कहा जाता है। इस दिन भक्त कालभैरव भगवान की पूजा करने के साथ व्रत भी करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान कालभैरव की पूजा रात्रि के समय की जाती है। भगवान भैरव की कृपा पाने के लिए यह तिथि श्रेष्ठ मानी जाती है। तो चलिए जानते हैं कालाष्टमी तिथि प्रारंभ एवं समाप्ति समय औऱ क्या है इस तिथि का महत्व...

Kalashtami February 2021 date significance time and puja vidhi
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कालाष्टमी महत्व

कालाष्टमी के दिन जो भक्त पूरी निष्ठा और नियम के साथ भगवान कालभैरव की पूजा और व्रत करता है, हर तरह के भय, संकट और शत्रु बाधा से मुक्ति प्राप्त होती है। साधारण जन को भगवान कालभैरव के बटुक रूप की पूजा करनी चाहिए क्योंकि उनका यह स्वरूप सौम्य है। कालभैरव भगवान का स्वरूप अत्यंत रौद्र है परंतु भक्तों के लिए वे बहुत ही दयालु और कल्याणकारी हैं।

Kalashtami February 2021 date significance time and puja vidhi
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कालाष्टमी का शुभ मुहूर्त

माघ मास कृष्ण अष्टमी तिथि 4 फरवरी 2021 दिन गुरूवार

 

अष्टमी तिथि आरंभ- 4 फरवरी 2021 दिन गुरूवार रात 12 बजकर 7 मिनट से

अष्टमी तिथि समाप्त- 5 फरवरी 2021 दिन शुक्रवार रात 10 बजकर 7 मिनट तक

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पूजा विधि- भगवान भैरव की कृपा पाने के लिए क्या करें

 

माना जाता है कि भगवान कालभैरव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। 


इस दिन अर्ध रात्रि में भगवान भैरव और मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। 

भगवान शिव की कथा पढ़नी-सुननी चाहिए।

फलाहार व्रत किया जा सकता है।

 

इस दिन व्रत और पूजन करने के साथ ही भैरव चालीसा का पाठ करना चाहिए। मान्यता है कि इससे कालभैरव भगवान की कृपा प्राप्त होती है।


कालाष्टमी के दिन कुत्ते को भोजन अवश्य कराना चाहिए, क्योंकि कुत्ते के भगवान भैरव की वाहन माना गया है।

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