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Bhaum pradosh vrat 2021: इस बार प्रदोष व्रत पर बन रहें हैं बेहद शुभ योग, जानिए महत्व, तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Fri, 18 Jun 2021 02:00 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Fri, 18 Jun 2021 02:00 PM IST
सार

  • इस बार 22 जून 2021 को पड़ रहा है भौम प्रदोष व्रत
  • इस दिन व्रत करने से शिव जी के साथ प्राप्त होती है हनुमान जी की कृपा
  • प्रदोष व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और रोग-दोष से मुक्ति प्राप्त होती है।
     

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Bhaum pradosh vrat 2021 date timing importance know the puja vidhi and shubh yog on pradosh vrat
भौम प्रदोष व्रत 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)

शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक माह में दोनों पक्षों कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखने का विधान है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित किया जाता है। इस दिन प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के समय पूजा करने का विधान है इसलिए इसे प्रदोष व्रत कहा जाता है। प्रदोष व्रत का नाम सप्ताह के दिनों के अनुसार होता है। इस बार ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी का व्रत 22 जून 2021 दिन मंगलवार को रखा जाएगा। इस बार प्रदोष व्रत मंगलवार को पड़ रहा है और मंगल को भौम भी कहा जाता है इसलिए यह व्रत भौम प्रदोष कहलाएगा। इस बार का प्रदोष व्रत अतिशुभ फलदायी माना जा रहा है। इस दिन ग्रह-नक्षत्र बहुत ही शुभ संयोग बना रहे हैं। इस दिन विधि विधान से पूजन और व्रत करने से जीवन के कष्टों से छुटकारा मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। जानिए इस दिन कौन से शुभ योग बन रहे हैं और क्या है प्रदोष व्रत पूजा विधि, महत्व व शुभ मुहूर्त।

 

Bhaum pradosh vrat 2021 date timing importance know the puja vidhi and shubh yog on pradosh vrat
भौम प्रदोष व्रत 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)

भौम प्रदोष व्रत का महत्व

प्रदोष व्रत को विधिपूर्वक श्रद्धा के साथ करने से मनुष्य के जीवन में सुख-समृद्धि आती है एवं रोग दोष से मुक्ति प्राप्त होती है। यह व्रत मंगलवार को पड़ने पर इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। मंगलवार का दिन हनुमान जी को समर्पित होता है इसके अलावा हनुमान जी को भगवान शिव का ही रूद्रावतार माना जाता है इसलिए मान्यता है कि भौम प्रदोष का व्रत करने से भगवान शिव के साथ हनुमान जी की कृपा भी प्राप्त होती है। ज्योतिष के अनुसार यह दिन मंगल ग्रह के लिए निर्धारित किया गया है, इसलिए इस दिन प्रदोष व्रत होने से मंगल ग्रह संबंधी दोष भी समाप्त हो जाते हैं। 

Bhaum pradosh vrat 2021 date timing importance know the puja vidhi and shubh yog on pradosh vrat
भौम प्रदोष व्रत 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
भौम प्रदोष व्रत का मुहूर्त-

ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि आरंभ- 22 जून 2021 दिन मंगलवार को सुबह 10 बजकर 22 मिनट से 

 

ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि समाप्त- 23 जून 2021 दिन बुधवार को प्रातः 6 बजकर 59 मिनट पर

 

प्रदोष काल पूजा समय- शाम 07 बजकर 22 मिनट से रात्रि 09 बजकर 23 मिनट

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भौम प्रदोष व्रत 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
त्रयोदशी तिथि को बन रहे हैं ये शुभ योग-

हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर सिद्धि व साध्य योग बन रहे हैं। इन दोनों योगों में कोई भी कार्य करने से उसमें सफलता प्राप्त होती है। मांगलिक कार्यों के लिए ये योग बेहद शुभ मानें जाते हैं। इस दिन दोपहर 1 बजकर 52 मिनट तक सिद्धि योग रहेगा। इसके बाद साध्य योग लग जाएगा। इस दिन विशाखा और अनुराधा नक्षत्र हैं। ये दोनों नक्षत्र भी ज्योतिष में शुभ माने जाते हैं। इस दिन दोपहर 02 बजकर 23 मिनट तक विशाखा नक्षत्र रहेगा। इसके बाद अनुराधा नक्षत्र लग जाएगा।

 

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भौम प्रदोष व्रत 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
प्रदोष व्रत पूजा विधि-
  • त्रयोदशी तिथि को प्रातः जल्दी उठकर स्नानादि करके भगवान का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • अब पूजा स्थान पर दीप प्रज्वलित करें और फल फूल अर्पित करें।
  • संध्या के समय स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। आप मंदिर में जाकर पूजन कर सकते हैं।
  • यदि मंदिर नहीं जा सकते हैं तो घर पर ही रेशमी कपड़े से मंडप सजाएं और शिवलिंग स्थापित करें।
  • भगवान भोलेनाथ का गंगा जल से अभिषेक करें और चंदन लगाएं।
  • धूप-दीप प्रज्जवलित करें और शिव जी को उनकी प्रिय चीजें धतूरा, भांग, बेलपत्र आदि अर्पित करें।
  • फल, फूल नैवेद्य से भगवान शिव के साथ माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा भी करें। 
  • इसके बाद वही पर बैठकर शिव चालीसा या मंत्र जाप करें।
  • पूजा पूर्ण हो जाने के बाद शिव जी की आरती करें।

प्रदोष व्रत में फलाहार का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन प्रातः दूध का सेवन करने के बाद पूरे दिन निर्जला व्रत करना चाहिए और प्रदोष काल में पूजन के पश्चात फलाहार लेना चाहिए।

 

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