प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाता है। इस बार 21 जून 2021 दिन सोमवार को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाएगा। निर्जला एकादशी का व्रत अत्यंत कठिन होता है। व्रत आरंभ होने के बाद अगले दिन पारण तक पानी पीना वर्जित माना जाता है। वैसे तो वर्ष की सभी एकादशी तिथि अपना अलग महत्व रखती हैं लेकिन निर्जला एकादशी का विशिष्ट महत्व माना गया है। इस व्रत को करने के सभी एकादशियों के फल की प्राप्त हो जाता है। धार्मिक मान्यतानुसार निर्जला एकादशी का व्रत नियम और निष्ठा के साथ रखने से मनुष्य को जीवन में सुख और यश की प्राप्ति होती है एवं इस जन्म के बाद मोक्ष प्राप्त होता है। इस एकादशी को भीमसेन या पांडव एकदाशी के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत का महातम्य स्वयं ऋषि वेदव्यास नें बताया है तो चलिए जानते हैं निर्जला एकादशी की कथा।
Nirjala ekadashi 2021: पूरे साल की एकादशियों के फल की होती है प्राप्ति, जानिए निर्जला एकादशी की कथा
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shashi Shashi
Updated Thu, 17 Jun 2021 06:55 PM IST
सार
ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली निर्जला एकादशी का व्रत रखने से प्राप्त होता है पूरे वर्ष भर की एकादशियों का फल। ऋषि वेदव्यास ने महाबली भीम को स्वयं बताया है इसका महात्म्य। जानिए निर्जला एकादशी व्रत कथा।
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