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Nirjala ekadashi 2021: पूरे साल की एकादशियों के फल की होती है प्राप्ति, जानिए निर्जला एकादशी की कथा

Thu, 17 Jun 2021 06:55 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Thu, 17 Jun 2021 06:55 PM IST
सार

ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली निर्जला एकादशी का व्रत रखने से प्राप्त होता है पूरे वर्ष भर की एकादशियों का फल। ऋषि वेदव्यास ने महाबली भीम को स्वयं बताया है इसका महात्म्य। जानिए निर्जला एकादशी व्रत कथा।

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Nirjala ekadashi 2021 date importance vrat Katha konw do he story of nirjala ekadashi
निर्जला एकादशी 2021

प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाता है। इस बार 21 जून 2021 दिन सोमवार को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाएगा। निर्जला एकादशी का व्रत अत्यंत कठिन होता है। व्रत आरंभ होने के बाद अगले दिन पारण तक पानी पीना वर्जित माना जाता है। वैसे तो वर्ष की सभी एकादशी तिथि अपना अलग महत्व रखती हैं लेकिन निर्जला एकादशी का विशिष्ट महत्व माना गया है। इस व्रत को करने के सभी एकादशियों के फल की प्राप्त हो जाता है। धार्मिक मान्यतानुसार निर्जला एकादशी का व्रत नियम और निष्ठा के साथ रखने से मनुष्य को जीवन में सुख और यश की प्राप्ति होती है एवं इस जन्म के बाद मोक्ष प्राप्त होता है। इस एकादशी को भीमसेन या पांडव एकदाशी के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत का महातम्य स्वयं ऋषि वेदव्यास नें बताया है तो चलिए जानते हैं निर्जला एकादशी की कथा।

Nirjala ekadashi 2021 date importance vrat Katha konw do he story of nirjala ekadashi
निर्जला एकादशी 2021 महत्व (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पौराणिक कथा के अनुसार जब महर्षि वेदव्यास ने पांडवों को चारों पुरुषार्थ- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष देने वाले एकादशी व्रत का संकल्प करा रहे थे तब महाबली भीम ने निवेदन किया- महर्षि आपने तो प्रति पक्ष एक दिन के उपवास की बात कही है। मैं तो एक दिन क्या एक समय भी भोजन के बगैर नहीं रह सकता, मेरे पेट में ‘वृक’ नाम की जो अग्नि है, उसे शांत रखने के लिए मुझे कई लोगों के बराबर और कई बार भोजन करना पड़ता है। तो क्या अपनी उस भूख के कारण मैं एकादशी जैसे पुण्यव्रत से वंचित रह जाऊंगा। आगे जानिए...

Nirjala ekadashi 2021 date importance vrat Katha konw do he story of nirjala ekadashi
निर्जला एकादशी 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)

तब महर्षि वेदव्यास ने भीम की समस्या का निदान करते हुए और उनका मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि नहीं, कुंतीनंदन, धर्म की यही तो विशेषता है कि वह न केवल सबको धारण करता है बल्कि सभी के योग्य साधन व्रत-नियमों को भी बड़ी सहज और लचीली व्यवस्था में उपलब्ध करवाता है। अतः आप ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की निर्जला नाम की एक ही एकादशी का व्रत करो। इससे तुम्हें वर्ष की समस्त एकादशियों के फल की प्राप्ति होगी। निःसंदेह तुम इस लोक में सुख, यश और प्राप्त कर मोक्ष लाभ प्राप्त करोगे।

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Nirjala ekadashi 2021 date importance vrat Katha konw do he story of nirjala ekadashi
निर्जला एकादशी 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)

इस तरह से महर्षि वेदव्यास के आश्वासन पर वृकोदर भीमसेन भी इस एकादशी का विधिवत व्रत करने के लिए सहमत हो गए, इसलिए वर्ष भर की एकादशियों का पुण्य लाभ देने वाली इस श्रेष्ठ निर्जला एकादशी को लोक में पांडव एकादशी या भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन जो स्वयं निर्जल रहकर ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को शुद्ध पानी से भरा हुआ घड़ा दान करता है। उसे जीवन में कभी भी किसी प्रकार की कमी नहीं होती। उसके जीवन में सदैव सुख-समृद्धि बनी रहती है।

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