आषाढ़ माह हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष का चौथा महीना होता है, जो धार्मिक, आध्यात्मिक और प्राकृतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। भीषण गर्मी के बाद आषाढ़ के इस महीने में वर्षा ऋतु का आगमन होता है, जिससे प्रकृति हरी-भरी और सुंदर हो उठती है। सनातन धर्म में प्रत्येक महीने को किसी न किसी भगवान या देवता को समर्पित किया जाता है, और आषाढ़ माह श्रीहरि विष्णु जी को समर्पित है। इस माह में विष्णु भगवान की पूजा-आराधना का विशेष महत्व होता है, जो जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार करती है।
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Ashadha Month 2025: जून में आषाढ़ माह कब होगा शुरू? जानिए इस महीने क्या करें और क्या न करें
Thu, 05 Jun 2025 02:18 PM IST
श्वेता सिंह
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्वेता सिंह
Updated Thu, 05 Jun 2025 02:18 PM IST
सार
Ashadha Month Importance: इस साल आषाढ़ माह 12 जून 2025 से शुरू होकर 10 जुलाई 2025 तक रहेगा। यह समय दिनचर्या और खानपान में बदलाव लाने का संकेत देता है, क्योंकि मौसम में बदलाव के साथ शरीर को अनुकूल बनाने की आवश्यकता होती है।
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आषाढ़ मास
- फोटो : adobe stock
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आषाढ़ मास का महत्व
आषाढ़ माह का आध्यात्मिक रूप से विशेष महत्व है। आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। इस अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। इस दौरान मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है। हालांकि, यह समय भजन-कीर्तन, तपस्या और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। आषाढ़ माह में आत्मशुद्धि, दान-पुण्य और पूजा-पाठ करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं, जो जीवन में समृद्धि और शांति लेकर आते हैं।
आषाढ़ मास
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आषाढ़ माह में क्या करें
- आषाढ़ माह में भगवान विष्णु की विशेष पूजा और भक्ति करें।
- देवशयनी एकादशी से पहले विष्णु जी को प्रसन्न करें।
- जल संरक्षण और जल दान अवश्य करें।
- जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और जल दान करें।
- हल्का और सुपाच्य भोजन करें, जैसे चावल, दाल, हरी सब्जियां और मौसमी फल।
- तुलसी पूजन नियमित रूप से करें और तुलसी को जल अर्पित करें।
- धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और तपस्या करें।
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आषाढ़ मास
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आषाढ़ माह में क्या न करें
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
- देवशयनी एकादशी से शुरू होने वाले चातुर्मास में कोई मांगलिक कार्य (जैसे शादी) न करें।
- मांसाहार और तामसिक भोजन का सेवन न करें।
- लहसुन और प्याज का अधिक सेवन न करें।
- आषाढ़ माह में बासी खाना खाने से बचें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।