June Pradosh Vrat 2025: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना गया है, क्योंकि यह देवों के देव महादेव को समर्पित है। इस दिन महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन सुखमय के लिए उपवास रखती हैं, जिसका पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है। हालांकि यह तिथि कन्याओं के लिए और भी खास है। मान्यता है कि इस दिन प्रभु को केवल जल चढ़ाने से मनचाहा वर पाने की कामना पूरी होती है। यह व्रत हर माह की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है और ज्येष्ठ माह में यह 8 जून 2025 को रखा जाएगा। इस दिन स्वाति नक्षत्र के साथ-साथ परिध व शिव योग का संयोग बन रहा है। ऐसे में महाकाल की उपासना करने से सभी ग्रह दोषों से मुक्ति और जीवन में सुख-समृद्धि के योग का निर्माण होता है। आइए प्रदोष व्रत की संपूर्ण पूजा विधि को जानते हैं।
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June Pradosh Vrat 2025: 8 या 9 जून कब है प्रदोष व्रत ? यहां जानें तिथि और भोलेनाथ की संपूर्ण पूजा विधि
Thu, 05 Jun 2025 11:44 AM IST
मेघा कुमारी
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: मेघा कुमारी
Updated Thu, 05 Jun 2025 11:44 AM IST
सार
June Pradosh Vrat 2025: इस साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 8 जून 2025 को सुबह 7 बजकर 17 मिनट पर होगी। इसका समापन 9 जून की सुबह 9 बजकर 35 मिनट पर होगा।
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हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना गया है, क्योंकि यह देवों के देव महादेव को समर्पित है।
- फोटो : freepik
इस साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 8 जून 2025 को सुबह 7 बजकर 17 मिनट पर होगी।
- फोटो : अमर उजाला
प्रदोष व्रत तिथि
इस साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 8 जून 2025 को सुबह 7 बजकर 17 मिनट पर होगी। इसका समापन 9 जून की सुबह 9 बजकर 35 मिनट पर होगा। उदया तिथि के मुताबिक 8 जून को प्रदोष व्रत रखा जाएगा।
प्रदोष व्रत पूजा के लिए सबसे पहले पूजा स्थान पर एक चौकी रखें।
- फोटो : अमर उजाला
प्रदोष व्रत पूजा विधि
- प्रदोष व्रत पूजा के लिए सबसे पहले पूजा स्थान पर एक चौकी रखें।
- इसपर लाल रंग का वस्त्र बिछाएं।
- अब सबसे पहले भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग स्थापित करें।
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अब शुद्ध जल, दूध, शहद, घी और शक्कर से शिवलिंग का अभिषेक करें।
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- अब शुद्ध जल, दूध, शहद, घी और शक्कर से शिवलिंग का अभिषेक करें।
- भोलेनाथ को फूल अर्पित करें।
- इसके बाद आप प्रभु को बेलपत्र चढ़ाएं।
- फिर धतूरा और चंदन लगाएं।
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भगवान शिव के आगे शुद्ध घी से दीपक जलाएं और उनके मंत्रों का जप करें
- फोटो : freepik
- इस दौरान देवी पार्वती को भी फूल अर्पित करें।
- भगवान शिव के आगे शुद्ध घी से दीपक जलाएं और उनके मंत्रों का जप करें
- प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें।
- शिव चालीसा पढ़ें।
- अंत में आरती करते हुए मिठाई का भोग लगाएं।
- बाद में इस मिठाई को प्रसाद के रूप में वितरित कर दें।