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Aja Ekadashi 2021 Date: कब है अजा एकादशी व्रत, जानें तिथि, मुहूर्त व्रत विधि और महत्व

Tue, 24 Aug 2021 07:23 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Tue, 24 Aug 2021 07:23 AM IST
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Aja Ekadashi 2021 Date muhurat vrat vidhi and katha
अजा एकादशी 2021 - फोटो : अमर उजाला।

अजा एकादशी व्रत भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि के दिन रखा जाता है। इस साल यह व्रत 3 सितंबर, शुक्रवार को रखा जाएगा। धार्मिक दृष्टि से यह व्रत बेहद ही महत्वपूर्ण माना जाता है। एकादशी का दिन भगवान विष्णु जी को प्रिय होता है। इस दिन उनकी आराधना की जाती है। साथ ही इस दिन लक्ष्मी जी की भी पूजा की जाती है। माना जाता है कि अजा एकादशी व्रत से मनुष्य के समस्त प्रकार के पापों का नाश हो जाता है। जो इसका व्रत करता है, वह इस लोक में सुख भोगकर अंत में विष्णु लोक में पहुंच जाता है। इस व्रत का फल अश्वमेघ यज्ञ, कठिन तपस्या, तीर्थों में दान-स्नान आदि से मिलने वाले फलों से भी अधिक होता है। यह व्रत एकादशी तिथि से प्रारंभ होकर द्वादशी तिथि की सुबह समाप्त होता है। शास्त्रों के अनुसार एकादशी के दिन सुबह उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए और एकादशी की रात जागरण कर श्री हरि विष्णु जी का पूजा-पाठ करना चाहिए। आइए जानते हैं अजा एकादशी व्रत मुहूर्त, व्रत विधि और कथा।

Aja Ekadashi 2021 Date muhurat vrat vidhi and katha
अजा एकादशी 2021 - फोटो : अमर उजाला।
एकादशी मुहूर्त 
एकादशी तिथि प्रारंभ - 2 सितंबर गुरुवार प्रातः काल 6:21 बजे
एकादशी तिथि समाप्त -  3 सितंबर 2021, शुक्रवार प्रातः काल 7:44 बजे
व्रत पारण - 4 सितंबर 2021, शनिवार को सुबह 5:30 बजे से सुबह 8:23 बजे तक 
Aja Ekadashi 2021 Date muhurat vrat vidhi and katha
अजा एकादशी 2021 - फोटो : अमर उजाला
अजा एकादशी व्रत विधि
  • प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि करें।
  • भगवान् विष्णु और माँ लक्ष्मी के नियम सहित पूजन करें।
  • दिन भर निराहार रहते हुए शाम को फलाहार कर सकते हैं।
  • इस व्रत में रात्रि जागरण करें।
  • द्वादशी तिथि के दिन प्रातः ब्राह्मण को भोजन कराएं व दान-दक्षिणा दें।
  • द्वादशी तिथि को ब्राह्मण भोजन करवाने के बाद उन्हें दान-दक्षिणा दें।
  • फिर स्वयं भोजन करें।
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Aja Ekadashi 2021 Date muhurat vrat vidhi and katha
अजा एकादशी 2021 - फोटो : सोशल मीडिया

अजा एकादशी व्रत कथा
पौराणिक काल में एक अत्यन्त वीर, प्रतापी तथा सत्यवादी हरिश्चंद्र नाम का चक्रवर्ती राजा राज्य करता था। प्रभु इच्छा से उसने अपना राज्य स्वप्न में एक ऋषि को दान कर दिया और परिस्थितिवश उन्हें अपनी स्त्री और पुत्र को भी बेच देना पड़ा। स्वयं वह एक चाण्डाल के दास बन गए। राजा ने उस चाण्डाल के यहाँ कफन लेने का काम किया, किन्तु उन्होंने इस मुश्किल काम में भी सत्य का साथ नहीं छोड़ा। जब इसी प्रकार कई वर्ष बीत गये तो उन्हें अपने इस नीच कर्म पर बड़ा दुख हुआ और वह इससे मुक्त होने का उपाय खोजने लगे। 

वह सदैव इसी चिन्ता में रहने लगे कि मैं क्या करूं? किस प्रकार इस नीच कर्म से मुक्ति पाऊं? एक बार की बात है, वह इसी चिन्ता में बैठे थे कि गौतम् ऋषि उनके पास पहुंचे। हरिश्चन्द्र ने उन्हें प्रणाम किया और अपनी दुख-भरी कथा सुनाई। राजा हरिश्चन्द्र की दुख-भरी कहानी सुनकर महर्षि गौतम भी अत्यन्त दुखी हुए और उन्होंने राजा से कहा- 'हे राजन! भादों के कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम अजा है। तुम उस एकादशी का विधानपूर्वक व्रत करो तथा रात्रि को जागरण करो। इससे तुम्हारे सभी पाप नष्ट हो जाएंगे।' 

महर्षि गौतम इतना कह कर चले गये। अजा नाम की एकादशी आने पर राजा हरिश्चन्द्र ने महर्षि के कहे अनुसार विधानपूर्वक उपवास तथा रात्रि जागरण किया। इस व्रत के प्रभाव से राजा के सभी पाप नष्ट हो गये। उस समय स्वर्ग में नगाड़े बजने लगे तथा पुष्पों की वर्षा होने लगी। उन्होंने अपने सामने ब्रह्मा, विष्णु, महेश तथा देवेन्द्र आदि देवताओं को खड़ा पाया एवं अपने मृतक पुत्र को जीवित तथा अपनी पत्नी को राजसी वस्त्र तथा आभूषणों से परिपूर्ण देखा। व्रत के प्रभाव से राजा को पुनः अपने राज्य की प्राप्ति हुई। 

वास्तव में एक ऋषि ने राजा की परीक्षा लेने के लिए यह सब कौतुक किया था, परन्तु अजा एकादशी के व्रत के प्रभाव से ऋषि द्वारा रची गई सारी माया समाप्त हो गई और अन्त समय में हरिश्चन्द्र अपने परिवार सहित स्वर्ग लोक को चले गए।

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