आचार्य चाणक्य महान समाजशास्त्री और अर्थशास्त्री थे। वे कूटनीति और राजनीति में निपुण थे। आचार्य चाणक्य विभिन्न विषयों का ज्ञान रखते थे। उन्होंने अपने अनुभव और ज्ञान को नीतिशास्त्र में संकलित किया है। आचार्य चाणक्य ने मनुष्य के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में नीतिशास्त्र में जिक्र किया है। आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में चार चीजों को सबसे महत्वपूर्ण बताया है। चाणक्य के अनुसार संसार में इन चीजों से महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है। तो चलिए जानते हैं कि वे कौन सी चीजें हैं जिन्हें आचार्य ने सर्वश्रेष्ठ बताया है।
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आचार्य चाणक्य
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अन्नदान सबसे बड़ा दान
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि पूरे ब्रह्मांड में अन्न के दान से बड़ा कोई दान नहीं है। चाणक्य के अनुसार किसी भूखे व्यक्ति को भोजन करवाना सबसे बड़ा पुण्य होता है। अन्न दान का महत्व धार्मिक ग्रंथों में भी बताया गया है। इसलिए मनुष्य को अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद लोगों को अन्न दान करना चाहिए।
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आचार्य चाणक्य
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द्वादशी तिथि है सबसे श्रेष्ठ
आचार्य चाणक्य के अनुसार तिथियों में सबसे श्रेष्ठ द्वादशी तिथि है। पूरे दिन भक्त निर्जला रहकर एकादशी का व्रत करते हैं और उसके अगले दिन द्वादशी तिथि पर व्रत का पारण किया जाता है।
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आचार्य चाणक्य
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गायत्री मंत्र
आचार्य चाणक्य अनुसार संपूर्ण सृष्टि और समस्त ब्रह्मांड में सभी मंत्रों से श्रेष्ठ गायत्री मंत्र है, क्योंकि यह देवी गायत्री का मंत्र है जो चारों वेदों ऋग्वेद, यजुर्वेद अथर्वेद और सामवेद की जननी हैं। देवी गायत्री से ही चारों वेदों की उत्पत्ति मानी गई है।
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Chanakya Success Mantra
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संपूर्ण सृष्टि में मां से श्रेष्ठ कुछ नहीं
आचार्य चाणक्य के अनुसार इस संपूर्ण सृष्टि और ब्रह्मांड में मां से बढ़कर और कुछ नहीं है। मां से ही हमें इस पृथ्वी पर लाती है इसलिए सदैव मां की सेवा में तत्पर रहना चाहिए। जो अपनी मां का सम्मान करता है उसकी आज्ञा का पालन करता है उसे अपने जीवन में सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। मां की सेवा को ही स्वर्ग के समान समझना चाहिए।