7th Mangla Gauri Vrat 2023: सावन का पवित्र महीना अब समापन की ओर है। यह महीना शिव और मां पार्वती को समर्पित है। सावन में सोमवार की ही तरह इस माह के मंगलवार भी बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। सावन में प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी का व्रत रखा जाता है और मां पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मंगला गौरी का व्रत अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखा जाता है। इसलिए विवाहित महिलाएं सावन में यह रखती हैं और मां मंगला गौरी की पूजा करती हैं। सावन माह के छह मंगला गौरी व्रत बीत चुके हैं। 15 अगस्त 2023 को सातवां मंगला गौरी व्रत है। धार्मिक मान्यता है कि मंगला गौरी व्रत में विधि पूर्वक करने से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही दांपत्य जीवन में प्रेम बना रहता है। चलिए जानते हैं मंगला गौरी व्रत और पूजा विधि के बारे में...
Mangla Gauri Vrat 2023: सातवां मंगला गौरी व्रत आज, जानें पूजा विधि और महत्व
मंगला गौरी व्रत विधि
- मंगला गौरी व्रत के दिन सूर्योदय से पहले उठ कर स्नानादि करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- फिर एक साफ लकड़ी की चौकी पर लाल रंग का वस्त्र बिछाकर मां पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- इसके बाद व्रत का संकल्प करें और आटे से बना हुआ दीपक प्रज्वलित करें। धूप, नैवेद्य फल-फूल आदि से मां गौरी की पूजा करें।
- आप पूजा में जो भी सामग्री जैसे सुहाग का सामान, फल, फूल, माला, मिठाई आदि जितनी भी चीजें अर्पित कर रही हैं, उनकी संख्या 16 होनी चाहिए।
- वहीं पूजा समाप्त होने के बाद मां गौरी की आरती करें और उनसे अखंड सौभाग्य के लिए प्रार्थना करें।
मंगला गौरी व्रत का महत्व
पारिवारिक सुख-शांति बनाए रखने और वैवाहिक जीवन से सभी कष्टों को दूर करने के लिए मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। वहीं यदि आप संतान प्राप्ति की कामना रखती हैं तो आपके लिए ये व्रत बहुत शुभ फलदायी रहता है।
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सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सवार्थ साधिके। शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।
ह्रीं मंगले गौरि विवाहबाधां नाशय स्वाहा।
मंगला गौरी आरती
जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता
ब्रह्मा सनातन देवी शुभ फल दाता। जय मंगला गौरी...।
अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता,
जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता। जय मंगला गौरी...।
सिंह को वाहन साजे कुंडल है,
साथा देव वधु जहं गावत नृत्य करता था। जय मंगला गौरी...।
सतयुग शील सुसुन्दर नाम सटी कहलाता,
हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता। जय मंगला गौरी...।
शुम्भ निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता,
सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाता। जय मंगला गौरी...।
सृष्टी रूप तुही जननी शिव संग रंगराताए
नंदी भृंगी बीन लाही सारा मद माता। जय मंगला गौरी...।
देवन अरज करत हम चित को लाता,
गावत दे दे ताली मन में रंगराता। जय मंगला गौरी...।
मंगला गौरी माता की आरती जो कोई गाता
सदा सुख संपति पाता।
जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता।।