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Vinayak Chaturthi 2021: अति उत्तम योग में विनायक चतुर्थी, ऐसे पाएं इसका लाभ

Tue, 16 Mar 2021 01:28 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Tue, 16 Mar 2021 01:28 PM IST
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Vinayak Chaturthi 2021 date muhurat vrat vidhi, significance and katha
विनायक चतुर्थी 2021 - फोटो : Pixabay

फाल्गुन माह की विनायक चतुर्थी 17 मार्च को है। इस माह की विनायक चतुर्थी बुधवार के दिन पड़ रही है और बुधवार का दिन गणपति महाराज का दिन होता है। ऐसे में इस दिन विनायक चतुर्थी का होना अति उत्तम संयोग है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गणपति महाराज की विधिवत पूजा करने से सौ गुना फल प्राप्त होता है। आइए जानते हैं विनायक चतुर्थी का शुभ मुहूर्त, व्रत विधि और व्रत कथा।

Vinayak Chaturthi 2021 date muhurat vrat vidhi, significance and katha
विनायक चतुर्थी 2021 - फोटो : Pixabay

विनायक चतुर्थी पूजा मुहूर्त
चतुर्थी तिथि प्रारंभ - 16 मार्च 08:58 बजे से
चतुर्थी तिथि समाप्त - 17 मार्च 11:28 बजे तक 
पूजा शुभ मुहूर्त - 17 मार्च 2021 को सुबह 11:17 से दोपहर 01:42 बजे तक है
कुल अवधि - 02 घंटे 24 मिनट

Vinayak Chaturthi 2021 date muhurat vrat vidhi, significance and katha
विनायक चतुर्थी 2021 - फोटो : Pixabay

विनायक चतुर्थी की पूजा विधि

  • सबसे पहले सुबह उठें और स्नान करें।
  • इस दिन लाल रंग के कपड़े पहनकर पूजा करनी चाहिए।
  • पूजा करते समय अपना मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
  • स्वच्छ आसन या चौकी पर भगवान को विराजित करें।
  • भगवान की प्रतिमा या चित्र के आगे धूप-दीप प्रज्जवलित करें।
  • ॐ गणेशाय नमः या ॐ गं गणपते नमः का जाप करें।
  • पूजा के बाद भगवान को लड्डू या तिल से बने मिष्ठान का भोग लगाएं।
  • शाम को व्रत कथा पढ़कर चांद देखकर अपना व्रत खोलें।
  • अपना व्रत पूरा करने के बाद दान करें।
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Vinayak Chaturthi 2021 date muhurat vrat vidhi, significance and katha
विनायक चतुर्थी 2021 - फोटो : Pixabay
विनायक चतुर्थी व्रत

पंचांग के अनुसार हर माह में दो बार संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जाता है। एक बार यह व्रत माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को किया जाता है तो वहीं दूसरी बार शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को व्रत रखा जाता है। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी वहीं शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। 

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Vinayak Chaturthi 2021 date muhurat vrat vidhi, significance and katha
विनायक चतुर्थी की कथा - फोटो : Pixabay

विनायक चतुर्थी के पौराणिक कथा
एक बार माता पार्वती के मन में एक ख्याल आता है कि उनका कोई पुत्र नहीं है। ऐसे ही वो अपने मन से एक बालक की मूर्ति बनाकर उसमें जीव भरती हैं। इसके बाद वे कंदरा में स्थित कुंड में स्नान करने के लिए चली जाती हैं। लेकिन जाने से पहले माता अपने पुत्र को आदेश देती हैं कि किसी भी परिस्थिति में किसी भी व्यक्ति को कंदरा में प्रवेश नहीं करने देना। बालक अपनी माता के आदेश का पालन करने के लिए कंदरा के द्वार पर पहरा देने लगता है। कुछ समय बीत जाने के पश्चात भगवान शिव वहां पहुंचते हैं। भगवान शिव जैसे ही कंदरा के अंदर जाने लगते हैं तो वह बालक उन्हें रोक देता है। महादेव बालक को समझाने का प्रयास करते हैं। लेकिन वह उनकी एक नहीं सुनता है। जिससे क्रोधित होकर भगवान शिव त्रिशूल से बालक का शीश धड़ से अलग कर देते हैं।

इस घटना का आभास जब माता पार्वती को हुआ तो वह स्नान करके कंदरा से बाहर आती हैं और देखती हैं कि उनका पुत्र धरती पर प्राण विहीन पड़ा है। उसका शीश उसके धड़ से अलग कटा हुआ है। यह दृष्य देखकर माता क्रोधित होती हैं। जिसे देखकर सभी देवी-देवता भयभीत हो जाते हैं। तब भगवान शिव अपने गणों को आदेश देते हैं कि ऐसे बालक का सिर ले आओ जिसकी माता की पीठ उसके बालक की ओर हो। शिवगण एक हथनी के बालक का शीश लेकर आते हैं। भगवान शिव गज के शीश को बालक के धड़ से जोड़कर उसे जीवित कर देते हैं। इसके बाद माता पार्वती शिवजी से कहती हैं कि यह शीश गज का है जिसके कारण सब मेरे पुत्र का उपहास करेंगे। तब भगवान शिव बालक को वरदान देते हैं कि आज से संसार इन्हें गणपति के नाम से जानेगा। इसके साथ ही सभी देव भी उन्हें वरदान देते हैं कि आज से वह प्रथम पूज्य हैं।

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