धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी तिथि भगवान विष्णु को प्रिय होती है। हर महीने में 2 एकादशी होती हैं। साल में कुल 24 एकादशी होती हैं। इस बार वैसाख माह की एकादशी शनिवार, 18 अप्रैल को पड़ रही है। इस एकादशी को वरुथिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। आइए, आज जानते हैं वरुथिनी एकादशी के व्रत में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
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Varuthini Ekadashi 2020: वरुथिनी एकादशी आज, जानिए व्रत के नियम, पूजा-विधि, मुहूर्त और फायदे
Sat, 18 Apr 2020 09:20 AM IST
योगेश जोशी
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: योगेश जोशी
Updated Sat, 18 Apr 2020 09:20 AM IST
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varuthini ekadashi 2020
- फोटो : social media
वरुथिनी एकादशी के नियम
कांसे के बर्तन में भोजन न करें
कांसे के बर्तन में भोजन न करें
- वरुथिनी एकादशी के दिन कांसे के बर्तन में भोजन नहीं करना चाहिए।
- वरुथिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। इस पवित्र दिन मांस मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।
- वरुथिनी एकादशी के दिन एक ही समय भोजन ग्रहण करना चाहिए।
- एकादशी का दिन भगवान विष्णु की पूजा का दिन होता है, इस दिन शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए। इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
varuthini ekadashi 2020
वरुथिनी एकादशी व्रत का फल
मोक्ष की प्राप्ति
मोक्ष की प्राप्ति
- वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से सभी पापों का नाश हो जाता है। इस दिन व्रत करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- वरुथिनी एकादशी सौभाग्य देने वाली है। इस दिन व्रत करने से दस हजार वर्षों के बराबर तप करने का फल मिलता है।
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वरुथिनी एकादशी पूजा विधि
- वरुथिनी एकादशी के दिन सुबह प्रात: जल्दी उठ कर स्नान करें।
- स्नान करने के बाद घर के मंदिर में दीपक जलाएं।
- भगवान विष्णु की प्रतिमा को स्नान करवाएं और उन्हें साफ धुले हुए वस्त्र पहनाएं।
- भगवान विष्णु की विधि- विधान से पूजा करें।
- भगवान की आरती करें।
- वरुथिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को भोग अवश्य लगवाएं। भोग लगाते समय इस बात का ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का ही भोग लगाया जाता है।
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वरुथिनी एकादशी व्रत मुहूर्त
एकादशी तिथि प्रारंभ
एकादशी तिथि प्रारंभ
- 17 अप्रैल को रात्रि 08:07 बजे से।
- 18 अप्रैल को रात 10:19 बजे तक।
- 19 अप्रैल को सुबह 05:51 से 08:26 बजे तक।
- 2 घंटे 35 मिनट