Chanting Mantra Under Peepal Tree: शक्ति और सिद्धि की प्रतीक शारदीय नवरात्रि इस वर्ष 22 सितंबर 2025 से शुरू हो रही है। यह नौ दिवसीय महापर्व केवल सात्विक पूजा-पाठ और व्रत-उपवास तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका तांत्रिक साधनाओं में भी विशेष महत्व है। तंत्र शास्त्र में नवरात्रि की रातों को अत्यंत शक्तिशाली माना गया है। इस दौरान की गई साधनाएं शीघ्र फलदायी होती हैं।
Shardiya Navratri 2025: नवरात्रि में तंत्र साधना का है विशेष महत्व, पीपल के पेड़ के नीचे करें इस मंत्र का जाप
शारदीय नवरात्रि की रातें तंत्र साधना के लिए अत्यंत शक्तिशाली होती हैं। इस दौरान पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाकर नर्वाण मंत्र जैसे सिद्ध मंत्र का जाप करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं। आइए इसकी वीधि जानते हैं।
साधना के लिए पीपल का पेड़ ही क्यों?
शास्त्रों में पीपल को एक जीवंत मंदिर माना गया है, जिसमें त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) का वास होता है। इसकी जड़ से लेकर पत्तियों तक दैवीय ऊर्जा का संचार होता है। मान्यता है कि पीपल के पेड़ के नीचे जपे गए मंत्र कई गुना अधिक शक्तिशाली हो जाते हैं और उनका प्रभाव अचूक होता है। नवरात्रि की रातों में यहां साधना करने से नकारात्मक ऊर्जा, ग्रह दोष और पुराने से पुराने संकटों से मुक्ति मिलती है। यह स्थान तंत्र क्रियाओं के लिए ऊर्जा का एक शक्तिशाली केंद्र बन जाता है।
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सभी बाधाओं को दूर करेगा यह महामंत्र
तंत्र साधना के लिए दुर्गा सप्तशती में वर्णित 'नर्वाण मंत्र' को सबसे शक्तिशाली माना गया है। यह मंत्र है- "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे"। यह कोई सामान्य मंत्र नहीं, बल्कि इसमें महाकाली (ऐं), महालक्ष्मी (ह्रीं) और महासरस्वती (क्लीं) की बीज शक्तियों का समावेश है। नवरात्रि में पीपल के नीचे इस मंत्र का जाप करने से साधक को बल, बुद्धि, धन, और सफलता मिलती है तथा शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। यह मंत्र एक शक्तिशाली सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।
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साधना की सही विधि
इस साधना को नवरात्रि की किसी भी रात्रि, विशेषकर अष्टमी या शनिवार की रात को सूर्यास्त के बाद कर सकते हैं। पीपल के पेड़ के नीचे साफ-सफाई कर एक काले रंग का आसन बिछाएं और पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। अपने सामने सरसों के तेल का एक दीपक जलाएं। इसके बाद रुद्राक्ष या काले हकीक की माला से "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" मंत्र की कम से कम 3, 5 या 11 माला का जाप करें। जाप के दौरान अपना ध्यान पूरी तरह से मंत्र और देवी के स्वरूप पर केंद्रित रखें।
तंत्र एक अत्यंत संवेदनशील मार्ग है, इसलिए इस साधना को पूरे विश्वास, श्रद्धा और पवित्रता के साथ करना चाहिए। मन में किसी के प्रति द्वेष या बुरे विचार न लाएं। साधना का उद्देश्य केवल अपनी समस्याओं का निवारण और आध्यात्मिक उन्नति होना चाहिए। यदि संभव हो तो यह क्रिया किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करें। सही विधि और सच्ची निष्ठा से की गई यह साधना आपके जीवन की दिशा बदल सकती है।
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