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Somvati Amavasya 2021: सोमवती अमावस्या का पौराणिक महत्व, पीपल की पूजा करने से मिलता है सौभाग्य

Thu, 08 Apr 2021 07:27 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद, नई दिल्ली
अनीता जैन, वास्तुविद, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 08 Apr 2021 07:27 AM IST
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somvati amavasya 2021 date significance importance and story
सोमवती अमावस्या 2021 - फोटो : अमर उजाला

सनातन धर्म में सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व है। हिन्दू पंचांग के अनुसार 12 अप्रैल 2021 चैत्र कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है। सोमवार के दिन अमावस्या की तिथि पड़ने के कारण इसे सोमवती अमावस्या कहते हैं। इस दिन की जाने वाली पूजा, स्नान और दान आदि का पुण्य जीवन में प्राप्त होता है।

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पीपल का महत्व
सोमवती अमावस्या के दिन पीपल पूजन करने से सौभाग्य बढ़ता है एवं पितृ प्रसन्न होकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं। सोमवार को भगवान शिव का दिन माना गया है एवं पीपल के वृक्ष में इस दिन अन्य देवताओं,पितरों के साथ शिवजी का भी वास माना गया है इसलिए सोमवती अमावस्या पर पीपल की पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है। पुण्यों में वृद्धि के लिए इस दिन पीपल की पूजा के साथ-साथ वृक्ष की परिक्रमा भी अवश्य करनी चाहिए।  

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पीपल का पौधा - फोटो : सोशल मीडिया

दीर्घायु प्रदान करता है पीपल
गीता में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं-'अश्वत्थः सर्ववृक्षाणाम' अर्थात 'में सब वृक्षों में पीपल का वृक्ष हूँ' इस कथन में उन्होंने अपने आपको पीपल के वृक्ष के समान ही बताया है। इसलिए इस वृक्ष को धार्मिक क्षेत्र में श्रेष्ठदेव वृक्ष की पदवी मिली और इसका विधिवत पूजन आरंभ हुआ। शास्त्रों के अनुसार खासतौर पर सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष को प्रणाम कर उसकी परिक्रमा करने से मानव की आयु लंबी होती है और जो व्यक्ति इसके वृक्ष पर जल अर्पित करता है उसके सभी पापों का अंत होकर स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

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शनिदेव
शनिदेव की पीड़ा से मिलेगी मुक्ति
शनिदेव की पीड़ा को शांत करने लिए भी पीपल के वृक्ष की पूजा का विधान बताया गया है। धर्म शास्त्रों के अनुसार इस दिन पीपल का वृक्ष रोपने से शनि ग्रह के दुष्प्रभावों से शांति मिलती है। हर व्यक्ति को अपने जीवन में पीपल का एक पेड़ तो अवश्य ही लगाना चाहिए। पीपल का पौधा लगाने वाले व्यक्ति को जीवन में किसी भी प्रकार संकट नहीं रहता है। इस पौधे को लगाने के बाद रविवार को छोड़कर नियमित रूप से जल भी अवश्य ही अर्पित करना चाहिए। जैसे-जैसे यह वृक्ष बढ़ेगा आपके घर में सुख-समृद्धि भी बढ़ती जाएगी। पीपल का पेड़ लगाने के बाद बड़े होने तक इसका पूरा ध्यान भी अवश्य ही रखना चाहिए, लेकिन ध्यान रहे कि पीपल को आप अपने घर से दूर लगाएं, घर पर पीपल की छाया नहीं पड़नी चाहिए।
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पीपल वृक्ष

त्रिदेव करते हैं निवास
पीपल ऐसा वृक्ष है जिसमें त्रिदेव निवास करते हैं। जिसकी जड़ में श्री विष्णु, तने में भगवान शंकर तथा अग्रभाग में साक्षात ब्रह्माजी निवास करते हैं।अश्वत्थ वृक्ष के रूप में साक्षात श्रीहरि ही इस भूतल पर निवास करते हैं।जैसे संसार में ब्राह्मण,गौ तथा देवता पूजनीय होते हैं,उसी प्रकार पीपल का वृक्ष भी अत्यंत पूजनीय माना गया है।पीपल को रोपने,रक्षा करने,छूने तथा पूजने से क्रमशः धन,उत्तम संतान,स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करता है।इसके आलावा पीपल में पितरों का वास माना गया है,सब तीर्थों का इसमें निवास होता है इसलिए मुंडन आदि संस्कार पीपल के नीचे करवाने का विधान है।पीपल की छाया यज्ञ,हवन,पूजापाठ,पुराण कथा आदि के लिए श्रेष्ठ मानी गई है।इसके पत्तों की वंदनवार को शुभ कार्यों में द्वार पर लगाया जाता है।यदि पीपल के वृक्ष के नीचे बैठकर रविवार को छोड़कर नित्य हनुमान चालीसा का पाठ किया जाए तो यह चमत्कारी फल प्रदान करने वाला उपाय है।मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति पीपल के वृक्ष के नीचे शिवलिंग स्थापित करता है तो उसके जीवन से बड़ी से बड़ी परेशानियां भी दूर हो जाती है। पीपल के नीचे शिवलिंग स्थापित करके उसकी नित्य पूजा भी अवश्य ही करनी चाहिए। इस उपाय से जातक को सभी भौतिक सुख सुविधाओं की प्राप्ति होती है।

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