Gudi padwa 2021: सनातन धर्म में चैत्र का महीना बहुत ही पवित्र और महत्वपूर्ण माना गया है। चैत्र का महीना हिंदू कैलेंडर का पहला महीना होता है। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि हिंदू नववर्ष का पहला दिन होता है। इसी तिथि से चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ भी होता है। 13 अप्रैल से हिंदू नववर्ष नव संवत्सर 2078 का आरंभ होगा, इसी दिन गुड़ी पड़वा का पर्व भी मनाया जाता है। मराठी समुदाय के लिए गुड़ी पड़वा का विशेष महत्व होता है। यह पूरे महाराष्ट्र में धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। दक्षिण भारत में इस पर्व को उगादी नाम से जाना जाता है। हिन्दू नववर्ष के शुभारंभ की खुशी में मनाया जाने वाला गुड़ी पड़वा के बारे में आइए जानते है कुछ खास बातें...
1. गुड़ी पड़वा विशेष रूप से महाराष्ट्र में मनाया जाता है। इसमें 'गुड़ी' शब्द का अर्थ 'विजय पताका' और पड़वा का अर्थ प्रतिपदा तिथि। गुड़ी पड़वा पर्व के मौक पर प्रत्येक घर में विजय के प्रतीक स्वरूप गुड़ी सजाई जाती है।
2. इस पर्व से जुड़ी एक मान्यता है कि इसी दिन शालिवाहन नाम के एक कुम्हार-पुत्र ने मिट्टी के सैनिकों की सेना से अपने शत्रुओं पर विजय पाई थी। यही कारण है कि इसी दिन शालिवाहन शक का प्रारंभ भी होता है।
3. गुड़ी पड़वा के दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। मान्यता यह भी है कि इसी दिन से सतयुग की शुरुआत हुई थी।
4.पौराणिक कथाओं से जुड़ी मान्यता है कि गुड़ी पड़वा के दिन ही प्रभु श्रीराम ने बालि का वध कर दक्षिण भारत में रहने वाले लोगों को उसके आतंक से मुक्त करवाया था। इसके बाद यहां की प्रजा ने खुश होकर अपने घरों में विजय पताका फहराई थी। जिसे गुड़ी कहा जाता है।