Shardiya Navratri 2025: वर्तमान में शारदीय नवरात्रि जारी है, जिसकी रौनक 2 अक्तूबर को विजया दशमी तक बनी रहेगी। मान्यता है कि यह समय देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा और उनकी असीम कृपा पाने का अवसर है। अगर इस अवधि में सच्चे भाव से उपासना-उपवास किया जाए, तो साधक के कष्टों का निवारण होता है। यही नहीं, देवी साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। लेकिन अगर आप किसी कारणवश नवरात्रि के उपवास नहीं रख पाए हैं, तो इन सरल उपायों से भी माता रानी का आशीर्वाद पा सकते हैं। आइए इनके बारे में जानते हैं।
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Shardiya Navratri 2025: नवरात्रि का नहीं रखा व्रत ? तो इन 5 सरल उपायों से पाएं मां दुर्गा की विशेष कृपा
Wed, 24 Sep 2025 12:59 PM IST
मेघा कुमारी
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मेघा कुमारी
Updated Wed, 24 Sep 2025 12:59 PM IST
सार
Shardiya Navratri 2025: वर्तमान में शारदीय नवरात्रि जारी है, जिसकी रौनक 2 अक्तूबर को विजया दशमी तक बनी रहेगी। मान्यता है कि यह समय देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा और उनकी असीम कृपा पाने का अवसर है।
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Shardiya Navratri 2025
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Shardiya Navratri 2025
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शारदीय नवरात्रि 2025 कैलेंडर
- 22 सितंबर 2025 – प्रतिपदा (शैलपुत्री पूजा)
- 23 सितंबर 2025 – द्वितीया (ब्रह्मचारिणी पूजा)
- 24 सितंबर 2025 – तृतीया (चन्द्रघण्टा पूजा)
- 26 सितंबर 2025 – चतुर्थी (कूष्माण्डा पूजा)
- 27 सितंबर 2025 – पञ्चमी (स्कन्दमाता पूजा)
- 28 सितंबर 2025 – महाषष्ठी (कात्यायनी पूजा)
- 29 सितंबर 2025 – महासप्तमी (कालरात्रि पूजा)
- 30 सितंबर 2025 – महाअष्टमी (महागौरी पूजा)
- 1 अक्टूबर 2025 – महानवमी (सिद्धिदात्री पूजा)
- 2 अक्टूबर 2025 – विजयादशमी
Shardiya Navratri 2025
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अवश्य करें ये उपाय
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि में देवी की रोजाना पूजा करें। इस दौरान मां दुर्गा को गुड़हल का फूल अर्पित करें। इसके प्रभाव से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती हैं।
- माना जाता है कि पान का बीड़ा लेकर मां दुर्गा के मंदिर में अर्पित करने से कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। यह सरल उपाय आपके लिए लाभकारी हो सकता है।
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- नवरात्रि की पूजा के समय आप लाल रंग के ऊनी आसन पर बैठें। फिर देवी की उपासना करें और उनके नामों का स्मरण करें। इससे जीवन में सकारात्मकता और ऊर्जा बनी रहती है।
- शारदीय नवरात्रि में लाल चीजों का दान, पीतल की घंटी का दान, अन्न, वस्त्र और धन का दान करने से भाग्योदय होता है।
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- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रोजाना पूजा में दुर्गा चालीसा का पाठ करने से मानसिक शांति, रोग से मुक्ति और कर्ज से राहत मिलती है। आप यहां से भी चालीसा पढ़ सकते हैं।
दुर्गा चालीसा पाठ (Durga Chalisa Path In Hindi)
नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूं लोक फैली उजियारी॥
शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥ रूप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत जन अति सुख पावे॥
तुम संसार शक्ति लै कीना। पालन हेतु अन्न धन दीना॥ अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥
प्रलयकाल सब नाशन हारी। तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥ शिव योगी तुम्हरे गुण गावें। ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥
रूप सरस्वती को तुम धारा। दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥ धरयो रूप नरसिंह को अम्बा। परगट भई फाड़कर खम्बा॥
रक्षा करि प्रह्लाद बचायो।हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥ लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं। श्री नारायण अंग समाहीं॥
क्षीरसिन्धु में करत विलासा। दयासिन्धु दीजै मन आसा॥ हिंगलाज में तुम्हीं भवानी। महिमा अमित न जात बखानी॥
मातंगी अरु धूमावति माता। भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥ श्री भैरव तारा जग तारिणी। छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥
केहरि वाहन सोह भवानी। लांगुर वीर चलत अगवानी॥ कर में खप्पर खड्ग विराजै। जाको देख काल डर भाजै॥
सोहै अस्त्र और त्रिशूला। जाते उठत शत्रु हिय शूला॥ नगरकोट में तुम्हीं विराजत। तिहुंलोक में डंका बाजत॥
शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे। रक्तबीज शंखन संहारे॥ महिषासुर नृप अति अभिमानी। जेहि अघ भार मही अकुलानी॥
रूप कराल कालिका धारा। सेन सहित तुम तिहि संहारा॥ परी गाढ़ संतन पर जब जब। भई सहाय मातु तुम तब तब॥
अमरपुरी अरु बासव लोका। तब महिमा सब रहें अशोका॥ ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी। तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥
प्रेम भक्ति से जो यश गावें। दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥ ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई। जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी। योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥ शंकर आचारज तप कीनो। काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को। काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥ शक्ति रूप का मरम न पायो। शक्ति गई तब मन पछितायो॥
शरणागत हुई कीर्ति बखानी। जय जय जय जगदम्ब भवानी॥ भई प्रसन्न आदि जगदम्बा। दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥
मोको मातु कष्ट अति घेरो। तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥ आशा तृष्णा निपट सतावें। रिपू मुरख मौही डरपावे॥
शत्रु नाश कीजै महारानी। सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥ करो कृपा हे मातु दयाला। ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला।
जब लगि जिऊं दया फल पाऊं। तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं॥ दुर्गा चालीसा जो कोई गावै। सब सुख भोग परमपद पावै॥
देवीदास शरण निज जानी। करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥
॥ इति श्री दुर्गा चालीसा सम्पूर्ण ॥
Shardiya Navratri 2025: नवरात्रि के दिनों में इन मंत्रों का करें जाप, मां दुर्गा का मिलेगा आशीर्वाद
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।