Shivling Jalabhishek: 'सावन' शिव-पार्वती की उपासना के लिए सबसे शुभ है। मान्यता है कि इसी माह महादेव ने माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकारा था है। तभी से सावन को भगवान शिव की पूजा और उन्हें प्रसन्न करने के लिए उत्तम माना जाता है।
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Shivling Jalabhishek: सावन में कैसे करें शिवलिंग पर जलाभिषेक, जानें संपूर्ण विधि
Thu, 10 Jul 2025 04:53 PM IST
मेघा कुमारी
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मेघा कुमारी
Updated Thu, 10 Jul 2025 04:53 PM IST
सार
Shivling Jalabhishek: यदि सावन में सच्चे भाव से शिवलिंग पर जलाभिषेक किया जाए, तो मानसिक शांति, शारीरिक बल और आर्थिक समृद्धि मिलती हैं। ऐसे में आइए जलाभिषेक की संपूर्ण विधि को जानते हैं।
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Sawan 2025
- फोटो : adobe
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कब है सावन 2025
सावन का महीना 11 जुलाई 2025 से शुरू होगा। इससे पहले 10 जुलाई को आषाढ़ पूर्णिमा है, जो 10 जुलाई की रात 1:36 बजे से शुरू होकर 11 जुलाई की रात 2:06 बजे तक रहेगी।
सावन का महीना 11 जुलाई 2025 से शुरू होगा। इससे पहले 10 जुलाई को आषाढ़ पूर्णिमा है, जो 10 जुलाई की रात 1:36 बजे से शुरू होकर 11 जुलाई की रात 2:06 बजे तक रहेगी।
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सावन के सोमवार व्रत की तिथियां
14 जुलाई – पहला सोमवार व्रत
21 जुलाई – दूसरा सोमवार व्रत
28 जुलाई – तीसरा सोमवार व्रत
04 अगस्त – चौथा और अंतिम सोमवार
14 जुलाई – पहला सोमवार व्रत
21 जुलाई – दूसरा सोमवार व्रत
28 जुलाई – तीसरा सोमवार व्रत
04 अगस्त – चौथा और अंतिम सोमवार
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जलाभिषेक की विधि
- शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के लिए सर्वप्रथम सुबह ही स्नान करें।
- फिर शिवलिंग के पास सभी पूजन सामग्रियों को एकत्रित कर लें।
- अब शिवलिंग के सामने हाथ जोड़कर महादेव का स्मरण करें।
- फिर दूध, दही, शहद, घी, शक्कर, गन्ने के रस से शिवलिंग पर अभिषेक करें।
- इस दौरान जल को आराम से चढ़ाएं ताकी धारा पतली रहे।
- जल चढ़ाते हुए ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें।
- इसके बाद गंगाजल में कुछ काले तिल डालकर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
- फिर इस जल को शिवलिंग पर अर्पित करें।
- महादेव को बेलपत्र, फूल व शहद चढ़ाएं।
- अब आटे का चौमुखी दीपक जलाकर शिव चालीसा का पाठ करें।
- अंत में महादेव की आरती करें और क्षमतानुसार जरूरतमंदों को दान करें।
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शिवलिंग पर जल चढ़ाने का मंत्र
मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम् ।
तदिदं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम् ॥
श्रीभगवते साम्बशिवाय नमः । स्नानीयं जलं समर्पयामि।
मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम् ।
तदिदं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम् ॥
श्रीभगवते साम्बशिवाय नमः । स्नानीयं जलं समर्पयामि।