Pradosh Vrat 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस साल 9 मई 2025 को प्रदोष व्रत है। इस दिन शुक्रवार का संयोग होने के कारण यह शुक्र प्रदोष कहलाएगा। मान्यता है कि इस तिथि पर महाकाल की पूजा-अर्चना करने से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं, साथ ही कर्ज, तनाव, क्लेश से भी मुक्ति मिलती हैं। यह दिन सुहागिनों के लिए और भी खास है। इस दिन भोलेनाथ को जल, बेलपत्र और शमी का फूल अर्पित करने से माता पार्वती प्रसन्न होती हैं। इसके प्रभाव से व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती हैं। इस बार शुक्र प्रदोष पर हस्त नक्षत्र और वज्र योग बन रहा है। ऐसे में प्रदोष व्रत की संपूर्ण कथा का पाठ अवश्य करें। इससे पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। आइए इस कथा को जानते हैं।
Pradosh Vrat 2025: शुभ योग में शुक्र प्रदोष व्रत आज, यहां पढ़िए संपूर्ण कथा
Pradosh Vrat 2025: इस साल 9 मई 2025 को प्रदोष व्रत है। इस दिन शुक्रवार का संयोग होने के कारण यह शुक्र प्रदोष कहलाएगा।
शुक्र प्रदोष व्रत कथा
प्रदोष व्रत महादेव की पूजा और उनकी कृपा पाने का सबसे शुभ दिन होता है। लेकिन इस दिन की उपासना बिना व्रत कथा के अधूरी मानी जाती है। ऐसे में आइए शुक्र प्रदोष व्रत की संपूर्ण कथा के बारे में जानते हैं। दरअसल, प्रदोष व्रत की कथा को लेकर यह कहा जाता है कि एक समय की बात है जब एक नगर में तीन खास दोस्त रहते थे, जिनका नाम राजकुमार, ब्राह्मण कुमार और धनिक पुत्र था। इन तीनों में से राजकुमार और ब्राह्मण कुमार दोनों की शादी हो चुकी थी। हालांकि कुछ समय बाद धनिक पुत्र का भी विवाह हो गया था। परंतु उसका गौना शेष था। यही कारण है कि उसकी पत्नी मायके में रहा करती थी।
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