Pradosh Vrat 2025: पंचांग के अनुसार हर महीने के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है, जिसे त्रयोदशी व्रत भी कहते हैं। इस दिन विशेष रूप से महादेव और शिव परिवार की पूजा की जाती है, जिसके प्रभाव से साधक की सभी समस्याएं समाप्त और जीवन में सुख-समृद्धि वास करती है।
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Pradosh Vrat 2025: शुभ योग में मई का पहला प्रदोष व्रत, इस विधि से करें भगवान शिव की पूजा
Wed, 07 May 2025 12:05 PM IST
मेघा कुमारी
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मेघा कुमारी
Updated Wed, 07 May 2025 12:05 PM IST
सार
Pradosh Vrat 2025: इस बार 9 मई 2025 के दिन प्रदोष व्रत रखा जा रहा है, जो वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि होगी। इस दिन हस्त नक्षत्र और वज्र योग का निर्माण हो रहा है, जिसपर बालव व कौलव करण का संयोग रहेगा।
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इस बार 9 मई 2025 के दिन प्रदोष व्रत रखा जा रहा है, जो वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि होगी। इस दिन हस्त नक्षत्र और वज्र योग का निर्माण हो रहा है
- फोटो : अमर उजाला
प्रदोष व्रत के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
- फोटो : adobe
पूजा विधि
- प्रदोष व्रत के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
- साफ वस्त्रों को धारण करें।
- पूजा स्थान पर भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग स्थापित करें।
- सबसे पहले साफ जल लेकर दूध, शहद, घी और शक्कर से शिवलिंग का अभिषेक करें।
- अब महादेव को बेलपत्र अर्पित करें।
- इसके बाद फूल माला, फूल, धतूरा और चंदन लगाएं।
- फिर शुद्ध घी से दीपक जलाएं।
- इस दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।
- शिव चालीसा का पाठ करें।
- आरती करें और पूजा में हुई भूल की क्षमा मांग।
महामृत्युंजय मंत्र
- फोटो : freepik
महामृत्युंजय मंत्र
ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।
ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।
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सुख और शांति प्राप्त करने का मंत्र
- फोटो : freepik
सुख और शांति प्राप्त करने का मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्!
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्!
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सुख और शांति प्राप्त करने का मंत्र
- फोटो : freepik
करचरण कृतं वाक्कायजं कर्मजं वा ।
श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधं ।
विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व ।
जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो ॥
श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधं ।
विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व ।
जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो ॥