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Parivartini Ekadashi 2025: आज करवट बदलेंगे भगवान विष्णु, जानें परिवर्तनी एकादशी पूजा विधि, मंत्र, आरती और कथा

Wed, 03 Sep 2025 10:55 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Wed, 03 Sep 2025 10:55 AM IST
सार

Parivartani Ekadashi 2025 Puja Vidhi: परिवर्तनी एकादशी विशेष रूप से भगवान विष्णु की आराधना के लिए समर्पित होता है, लेकिन मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए भी इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन को करवट एकादशी भी कहा जाता है। आज के दिन श्रद्धा और भक्ति से उपवास करने तथा विष्णु जी की पूजा-अर्चना करने से साधक को सुख, समृद्धि और पुण्य की प्राप्ति होती है।

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Parivartini Ekadashi 2025  Pujan Vidhi Importance Mantra aarti and Katha in Hindi
parivartani ekadashi 2025 - फोटो : अमर उजाला

Parivartini Ekadashi 2025:  आज यानी 3 सितंबर को परिवर्तनी एकादशी है।  हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को अत्यंत पवित्र और फलदायक माना गया है। यह दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु की आराधना के लिए समर्पित होता है, लेकिन मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए भी इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि एकादशी के दिन श्रद्धा और भक्ति से उपवास करने तथा विष्णु जी की पूजा-अर्चना करने से साधक को सुख, समृद्धि और पुण्य की प्राप्ति होती है।


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कुछ श्रद्धालु इस दिन निर्जला व्रत भी रखते हैं, जो अत्यंत कठिन होने के बावजूद बेहद पुण्यकारी माना जाता है। इस व्रत का पालन करने से जीवन में नकारात्मकता दूर होती है और ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त होती है। एकादशी का यह व्रत न केवल आध्यात्मिक उन्नति देता है, बल्कि मन को शांति और आत्मा को संतोष भी प्रदान करता है।
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Parivartini Ekadashi 2025  Pujan Vidhi Importance Mantra aarti and Katha in Hindi
एकादशी व्रत पूजा विधि - फोटो : freepik

एकादशी व्रत पूजा विधि

  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर भगवान विष्णु का स्मरण करें।
  • व्रत का संकल्प लें और स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • घर के मंदिर या पूजा स्थल की सफाई करें।
  • शुद्धता के लिए गंगाजल का छिड़काव करें।
  • एक चौकी पर स्वच्छ कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
  • दीपक जलाएं (शुद्ध घी या तिल के तेल का दीपक)।
  • भगवान विष्णु को तुलसी पत्र, पीले फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • विष्णु सहस्त्रनाम, भगवद गीता या भगवान विष्णु के मंत्रों का पाठ करें।
  • दिनभर व्रत रखें ।
  • शाम को फिर से भगवान विष्णु की पूजा करें और आरती करें।
  • पूजा के दौरान धूप, दीप और कपूर अवश्य जलाएं।
  • तुलसी दल को भगवान विष्णु के भोग में अवश्य शामिल करें, यह अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।
  • अंत में भगवान विष्णु की आरती करें।
  • पूजा के बाद सभी भक्तों में प्रसाद वितरण करें।
Parivartini Ekadashi 2025  Pujan Vidhi Importance Mantra aarti and Katha in Hindi
भगवान विष्णु को अर्पित करें  ये भोग - फोटो : instagram

भगवान विष्णु को अर्पित करें  ये भोग 

  • फल
  • मिठाई
  • पंचामृत
  • पंजीरी
  • गुड़ और चने
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Parivartini Ekadashi 2025  Pujan Vidhi Importance Mantra aarti and Katha in Hindi
भगवान विष्णु के इन मंत्रों का करें जाप - फोटो : adobe stock
करें इन मंत्रों का जाप 

शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम्
विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्॥

मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥

ॐ वासुदेवाय विघ्माहे वैधयाराजाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात् ||

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे अमृता कलसा हस्थाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात् ||

 ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय नमः।


 
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Parivartini Ekadashi 2025  Pujan Vidhi Importance Mantra aarti and Katha in Hindi
भगवान विष्णु की आरती - फोटो : Amar Ujala

भगवान विष्णु की आरती

ॐ जय जगदीश हरे , स्वामी!
जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे।
  
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे।

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥
ॐ जय जगदीश हरे।

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ॐ जय जगदीश हरे।

तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
स्वामी तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे।

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ॐ जय जगदीश हरे।

दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ॐ जय जगदीश हरे।

विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
स्वमी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥
ॐ जय जगदीश हरे।

श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
ॐ जय जगदीश हरे।

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