Nirjala Ekadashi 2025: निर्जला एकादशी हिंदू धर्म की सबसे कठिन और पुण्यदायी एकादशियों में से एक, इस वर्ष 6 जून ,शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन बिना जल ग्रहण किए उपवास किया जाता है, इसलिए इसे 'निर्जला' एकादशी कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति सभी एकादशियों का पालन नहीं कर सकता, वह केवल निर्जला एकादशी का व्रत करके पूरे वर्ष की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त कर सकता है। इस दिन दान करने का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक दान करता है, उसके जीवन में धन, सुख और समृद्धि बनी रहती है।
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Nirjala Ekadashi Daan: क्या है निर्जला एकादशी पर दान का महत्व, जानिए किन चीजों का दान करना होता है शुभ
Fri, 06 Jun 2025 09:25 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Fri, 06 Jun 2025 09:25 AM IST
सार
Nirjala Ekadashi Upay in Hindi: निर्जला एकादशी पर दान करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक दान करता है, उसके जीवन में धन, सुख और समृद्धि बनी रहती है।
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निर्जला एकादशी का महत्व
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1. जल से भरा घड़ा (जलदान)
निर्जला एकादशी के दिन जल का विशेष महत्व होता है। इस दिन मिट्टी या तांबे के पात्र में जल भरकर दान देना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इसे जीवनदाता और पापनाशक कहा गया है। जलदान से प्यासे प्राणियों की सेवा होती है और व्यक्ति के जीवन में शांति और सुख की वृद्धि होती है।
2. छाता
गर्मी के मौसम में सूर्य की तीव्र किरणों से बचाव के लिए छाते का दान बहुत उपयोगी होता है। यह दान किसी राहगीर, साधु या ज़रूरतमंद को दिया जाए तो उससे अत्यधिक पुण्य मिलता है। धार्मिक मान्यता है कि छाता दान करने से व्यक्ति को भगवान की कृपा प्राप्त होती है।
निर्जला एकादशी के दिन जल का विशेष महत्व होता है। इस दिन मिट्टी या तांबे के पात्र में जल भरकर दान देना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इसे जीवनदाता और पापनाशक कहा गया है। जलदान से प्यासे प्राणियों की सेवा होती है और व्यक्ति के जीवन में शांति और सुख की वृद्धि होती है।
2. छाता
गर्मी के मौसम में सूर्य की तीव्र किरणों से बचाव के लिए छाते का दान बहुत उपयोगी होता है। यह दान किसी राहगीर, साधु या ज़रूरतमंद को दिया जाए तो उससे अत्यधिक पुण्य मिलता है। धार्मिक मान्यता है कि छाता दान करने से व्यक्ति को भगवान की कृपा प्राप्त होती है।
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3. चप्पल या जूते
पैदल चलने वालों के लिए जूते या चप्पल किसी वरदान से कम नहीं होते। इस दिन जरूरतमंद को चप्पल या जूते दान करना पापों का नाश करता है और जीवन की बाधाओं को दूर करता है।
4. वस्त्र
निर्जला एकादशी पर वस्त्र दान करना बहुत शुभ होता है। खासकर गेरुए या सफेद वस्त्र ब्राह्मणों या साधु-संतों को दान करना श्रेष्ठ फलदायी होता है। यह दान दरिद्रता को दूर करता है और लक्ष्मी कृपा प्रदान करता है।
पैदल चलने वालों के लिए जूते या चप्पल किसी वरदान से कम नहीं होते। इस दिन जरूरतमंद को चप्पल या जूते दान करना पापों का नाश करता है और जीवन की बाधाओं को दूर करता है।
4. वस्त्र
निर्जला एकादशी पर वस्त्र दान करना बहुत शुभ होता है। खासकर गेरुए या सफेद वस्त्र ब्राह्मणों या साधु-संतों को दान करना श्रेष्ठ फलदायी होता है। यह दान दरिद्रता को दूर करता है और लक्ष्मी कृपा प्रदान करता है।
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एसी के साथ पंखा
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5. पंखा या कूलर
गर्मियों में पंखा दान करना एक सेवा के रूप में माना गया है। निर्जला एकादशी पर पंखा दान करने से वातावरण की गर्मी से राहत मिलती है और यह कार्य व्यक्ति के भीतर दया और करुणा को बढ़ाता है।
6. मिठाई या फल
इस दिन किसी ब्राह्मण, साधु या गरीब को फल या मिठाई का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में इसे अन्नदान की तरह महत्वपूर्ण माना गया है। यह व्यक्ति के जीवन में मधुरता और सौभाग्य लाता है।
गर्मियों में पंखा दान करना एक सेवा के रूप में माना गया है। निर्जला एकादशी पर पंखा दान करने से वातावरण की गर्मी से राहत मिलती है और यह कार्य व्यक्ति के भीतर दया और करुणा को बढ़ाता है।
6. मिठाई या फल
इस दिन किसी ब्राह्मण, साधु या गरीब को फल या मिठाई का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में इसे अन्नदान की तरह महत्वपूर्ण माना गया है। यह व्यक्ति के जीवन में मधुरता और सौभाग्य लाता है।
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7. गाय को चारा और जल
गाय को गौमाता माना गया है और उसे हरा चारा, गुड़ या पानी पिलाना पुण्यदायी कार्य है। निर्जला एकादशी के दिन ऐसा करने से भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
8. शर्बत या ठंडे पेय का वितरण
गर्मी के मौसम में प्यासे लोगों को ठंडा पानी, शर्बत या बेल का रस पिलाना बहुत पुण्य का कार्य है। विशेष रूप से निर्जला एकादशी पर इस सेवा को अत्यधिक फलदायी माना गया है। इससे जीवन में संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा आती है।
गाय को गौमाता माना गया है और उसे हरा चारा, गुड़ या पानी पिलाना पुण्यदायी कार्य है। निर्जला एकादशी के दिन ऐसा करने से भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
8. शर्बत या ठंडे पेय का वितरण
गर्मी के मौसम में प्यासे लोगों को ठंडा पानी, शर्बत या बेल का रस पिलाना बहुत पुण्य का कार्य है। विशेष रूप से निर्जला एकादशी पर इस सेवा को अत्यधिक फलदायी माना गया है। इससे जीवन में संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा आती है।