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Navratri Ashtami Puja 2021: मां दुर्गा का साक्षात स्वरूप हैं कन्याएं, पूजन से घर का वास्तुदोष होता है दूर

Mon, 19 Apr 2021 11:49 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद, नई दिल्ली
अनीता जैन, वास्तुविद, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 19 Apr 2021 11:49 AM IST
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navratri ashtami puja 2021 importance and puja vidhi
kanya pujan - फोटो : अमर उजाला

प्रथम नवरात्रि से लेकर नवमी तक कभी भी कन्या पूजन कर सकते हैं। परंतु अष्टमी और नवमी के दिन कन्याओं का पूजन करना और भी श्रेष्ठ माना गया है। इस बार अष्टमी तिथि 20 अप्रैल एवं नवमी 21 अप्रैल की है। नवरात्रि में मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए हम उपवास, पूजा, अनुष्ठान आदि करते है जिससे जीवन में भय ,विघ्न और शत्रुओं का नाश होकर सुख -समृद्धि आती है। मान्यता है कि हवन, जप और दान से देवी इतनी प्रसन्न नहीं होतीं जितनी कन्या पूजन से प्रसन्न होती हैं। कन्या, सृष्टि सृजन श्रृंखला का अंकुर होती है। यह पृथ्वी पर प्रकृति स्वरुप माँ शक्ति का प्रतिनिधित्व करती है। शास्त्रों के अनुसार सृष्टि सृजन में शक्ति  रुपी नौ दुर्गा, व्यवस्थापक रुपी नौ ग्रह, त्रिविध तापों से मुक्ति दिलाकर चारों पुरुषार्थ दिलाने वाली नौ प्रकार की  भक्ति ही संसार संचालन में प्रमुख भूमिका निभाती है।

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kanya pujan

साक्षात शक्ति का स्वरूप हैं कन्याएं
कन्या पूजन के दौरान नौ कन्याओं को माँ दुर्गा के नौ रूप मानकर ही पूजा की जाती है। पुराणों के अनुसार कन्या के जन्म का एक वर्ष बीतने के पश्चात कन्या को कुंवारी की संज्ञा दी गई है। अतः दो वर्ष की कन्या को कुमारी, तीन वर्ष की कन्या को त्रिमूर्ति, चार वर्ष की कल्याणी,पांच वर्ष की रोहिणी, छह वर्ष की कलिका, सात वर्ष की चंडिका, आठ वर्ष की शाम्भवी,नौ वर्ष की दुर्गा तथा दस वर्ष की कन्या सुभद्रा के सामान मानी जाती हैं। 

धर्मग्रंथों के अनुसार तीन वर्ष से लेकर नौ वर्ष की कन्याएं साक्षात शक्ति का स्वरुप मानी गई हैं। दुर्गा सप्तशती में कहा गया है कि दुर्गा पूजन से पहले भी कन्या का पूजन करें ,तत्पश्चात ही माँ दुर्गा का पूजन आरम्भ करें। श्रद्धा भाव से की गई एक कन्या की पूजा से ऐश्वर्य, दो कन्या की पूजा से भोग, तीन की से चारों पुरुषार्थ और राज्यसम्मान,चार और पांच की पूजा से बुद्धि-विद्या ,छह की पूजा से कार्यसिद्धि,सात की पूजा से परमपद , आठ की पूजा से अष्टलक्ष्मी और नौ कन्याओं की पूजा से सभी प्रकार के ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

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kanya pujan - फोटो : अमर उजाला

कन्या पूजन हो ऐसा
कन्याओं का पूजन करते समय सर्वप्रथम शुद्ध जल में हल्दी मिलाकर उनके चरण धोने चाहिए। तत्पश्चात उन्हें स्वच्छ आसन पर बैठाएं, ध्यान रहे आसन काले और नीले रंग का नहीं होना चाहिए। खीर,पूरी,चने,हलवा और कच्चा नारियल आदि सात्विक भोजन का माता को भोग लगाकर कन्याओं को भोजन कराएं। कहीं कहीं नौ कन्याओं के साथ एक छोटे बालक को भी भोज कराने की परम्परा है। बालक भैरव बाबा का स्वरुप या लांगूर कहा जाता है। जिस प्रकार देवी माँ की पूजा भैरव के बिना पूरी नहीं होती उसी प्रकार कन्या पूजन भी एक बालक के पूर्ण नहीं माना जाता है। कन्याओं को सुमधुर भोजन कराने के बाद उन्हें रोली का टीका लगाकर अक्षत जरूर लगाएं और कलाई पर रक्षासूत्र बांधें। प्रदक्षिणा कर उनके चरण स्पर्श करते हुए यथाशक्ति वस्त्र, फल और दक्षिणा देकर विदा करें। इस तरह नवरात्र पर्व पर कन्या का पूजन करके भक्त माँ की कृपा पा सकते हैं।

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कन्या पूजन से वास्तुदोषों का निवारण
माना जाता है कि नवरात्रि के दिनों में कन्याओं को देवी का रूप मानकर आदर-सत्कार करने एवं भोजन कराने से घर का वास्तुदोष दूर होता है। घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होकर घर में सुख-समृद्धि आती है। मनुष्य प्रकृति रुपी कन्याओं का पूजन करके साक्षात भगवती की कृपा पा सकते हैं। इन कन्याओं में माँ दुर्गा का वास रहता है।

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